कर्नल श्रीकांत प्रसाद पुरोहित (सोर्स: सोशल मीडिया)
Colonel Shrikant Purohit Retirement News: वर्ष 2008 के चर्चित मालेगांव बम धमाके मामले में लंबी कानूनी लड़ाई जीतने वाले कर्नल श्रीकांत प्रसाद पुरोहित के लिए एक और बड़ी खुशखबरी सामने आई है। आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल (AFT) ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कर्नल पुरोहित के रिटायरमेंट पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। ट्रिब्यूनल ने न केवल उनके सेना से विदा होने की प्रक्रिया को रोका है, बल्कि उनके उन तमाम सर्विस बेनिफिट्स और प्रमोशन की बहाली का रास्ता भी साफ कर दिया है, जो बीते डेढ़ दशक से कानूनी दांव-पेंचों में फंसे हुए थे।
ट्रिब्यूनल ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि पिछले साल 31 जुलाई 2025 को मुंबई की स्पेशल एनआईए कोर्ट द्वारा कर्नल पुरोहित को बरी किए जाने का फैसला बेहद महत्वपूर्ण है। कोर्ट ने माना कि कर्नल पुरोहित के खिलाफ लगाए गए आरोप न केवल निराधार थे, बल्कि रिकॉर्ड्स को देखने से पता चलता है कि उन्हें इस मामले में ‘गैर-कानूनी और मनगढ़ंत’ तरीके से फंसाया गया था। ट्रिब्यूनल ने कहा, “पहली नजर में यह मामला कर्नल पुरोहित के पक्ष में नजर आता है। उन्हें अपने जूनियर्स के बराबर प्रमोशन और अन्य वित्तीय लाभ मिलने चाहिए, जो इस केस की वजह से रुके हुए थे।”
कर्नल पुरोहित ने ट्रिब्यूनल के समक्ष दलील दी थी कि मालेगांव केस में उनकी गिरफ्तारी और जेल की सजा के कारण उनका करियर पूरी तरह ठप हो गया था। उनके साथ के अधिकारी और यहां तक कि उनके जूनियर्स भी ऊंचे पदों पर पहुंच गए, जबकि उन्हें अपनी बेगुनाही साबित करने में 17 साल लग गए। उन्होंने मांग की थी कि उन्हें ‘नोशनल प्रमोशन’ दिया जाए और उनकी सर्विस को निरंतर मानते हुए सभी भत्ते दिए जाएं।
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आमतौर पर सैन्य नियमों के तहत एक निश्चित उम्र या रैंक के कार्यकाल के बाद अधिकारी रिटायर हो जाते हैं। लेकिन ट्रिब्यूनल के इस आदेश का मतलब है कि जब तक उनकी विभागीय शिकायत पर अंतिम फैसला नहीं हो जाता, तब तक वे सेना के रिकॉर्ड में कार्यरत बने रहेंगे। यह फैसला उन सभी सैन्य अधिकारियों के लिए एक मिसाल है जो झूठे मामलों के कारण अपने करियर का नुकसान झेलते हैं।