ठाणे: MBMC में 12 करोड़ के ठेके पर बवाल, बिना ई-टेंडर बीजेपी से जुड़ी कंपनी को मंजूरी का आरोप

E-Tender Controversy In Thane: एमबीएमसी में 12 करोड़ के ठेके को बिना ई-टेंडर मंजूरी देने पर विवाद गहराया। राजनीतिक पक्षपात और भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच स्वतंत्र जांच व कार्रवाई की मांग उठी।
MBMC E-Tender Controversy In Thane Mira Bhayandar 12 Crore Corporation Controversy
ई-टेंडर विवाद (सोर्स: AI)
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MBMC E-Tender Controversy In Thane: मीरा- भाईंदर महानगरपालिका (एमबीएमसी) की स्थायी समिति द्वारा 150 कर्मचारियों की आपूर्ति के लिए बिना ई-टेंडर प्रक्रिया अपनाए नई एजेंसी को मंजूरी दिए जाने पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिक संगठनों ने इस निर्णय को नियमों के विपरीत बताते हुए राजनीतिक पक्षपात और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं।

मामले में उपायुक्त के खिलाफ कार्रवाई और स्वतंत्र जांच की मांग उठी है, जबकि मनपा आयुक्त राधाबिनोद शर्मा ने शिकायत पर अतिरिक्त आयुक्त से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।

क्या है आरोप?

स्थायी समिति ने 3 जुलाई 2026 को 150 कर्मियों की आपूर्ति के लिए 'ओम साई सिक्योरिटी एंड फैसिलिटी मैनेजमेंट' को बिना ई-टेंडर, अनुबंध देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। सामाजिक कार्यकर्ताओं का दावा है कि कंपनी कर्मचारियों को समय पर वेतन, पीएफ और ईएसआई जैसी वैधानिक सुविधाएं उपलब्ध कराने में विफल रही है।

विवाद इसलिए भी गहरा गया है क्योंकि इससे पहले कार्यरत 'स्वामी समर्थ सिक्योरिटी एंड हॉस्पिटैलिटी प्रा. लि.' का अनुबंध 31 मार्च 2026 को समाप्त हो चुका था। मनपा के आंतरिक दस्तावेजों के अनुसार, उस कंपनी को वेतन भुगतान, सुरक्षा उपकरण, वर्दी उपलब्ध न कराने और प्रशासनिक नियमों के उल्लंघन सहित 19 नोटिस जारी किए गए थे।

सत्याकाम फाउंडेशन के अध्यक्ष एवं एड. कृष्णा गुप्ता ने आरोप लगाया है कि प्रशासन ने जानबूझकर समय पर नई निविदा प्रक्रिया पूरी नहीं की, ताकि महाराष्ट्र महानगरपालिका अधिनियम की अनुसूची ' ड 'अध्याय-5, नियम 2(2) के आपातकालीन प्रावधान का सहारा लेकर पसंदीदा ठेकेदार को लाभ पहुंचाया जा सके।

नई निविदा प्रक्रिया

एड. कृष्णा गुप्ता का कहना है कि मनपा आयुक्त द्वारा 7 अगस्त 2025 को सभी विभागों को समय रहते नई निविदा प्रक्रिया पूरी करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए थे, लेकिन उनका पालन नहीं किया गया।

गुप्ता ने यह भी आरोप लगाया कि 22 मई 2026 को आरोग्य विभाग की उपायुक्त कविता बोरकर ने करीब 12 करोड़ रुपये के नियमित ई-टेंडर का प्रस्ताव महासभा में रखा था, लेकिन उसे आगे नहीं बढ़ाया गया। इसके बाद 3 जुलाई को बिना ई-टेंडर उसी कार्य के लिए आपातकालीन प्रावधान के तहत प्रस्ताव लाकर स्थायी समिति से मंजूरी दिला दी गई।

ई-टेंडर प्रक्रिया को दरकिनार कर नियमों की अनदेखी की गई और इससे राजनीतिक संरक्षण के आरोपों को बल मिला है। उनका कहना है कि यह मामला केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत जांच का विषय भी हो सकता है।

अब आगे क्या?

इस पूरे मामले में एड. कृष्णा गुप्ता ने उपायुक्त कविता बोरकर के निलंबन, विभागीय जांच तथा किसी स्वतंत्र एवं निष्पक्ष एजेंसी से पूरे प्रकरण की जांच कराने की मांग की है। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए मनपा आयुक्त राधाबिनोद शर्मा ने अतिरिक्त आयुक्त से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। अब सभी की नजर प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी है।

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