कल्याण चुनाव: भाजपा उम्मीदवार डॉ. पंकज उपाध्याय का नामांकन जबरन वापस, उत्तर भारतीयों में रोष

BJP Candidate: कल्याण में भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी डॉ. पंकज उपाध्याय का नामांकन स्थानीय नेताओं द्वारा जबरन वापस कराने का मामला तूल पकड़ गया है। उत्तर भारतीय समाज ने इसे अपना अपमान बताते हुए चुनाव में
KDMC Election
BJP Candidate:कल्याण में भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी (सोर्सः सोशल मीडिया)
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KDMC Election: कल्याण-डोंबिवली नगर पालिका (केडीएमसी) चुनावों के बीच भारतीय जनता पार्टी के भीतर मचे आंतरिक घमासान ने अब जातिगत और क्षेत्रीय स्वाभिमान की लड़ाई का रूप ले लिया है। मामला पैनल क्रमांक-7 (ड) का है, जहां भाजपा के अधिकृत उम्मीदवार डॉ. पंकज उपाध्याय को पार्टी के ही कुछ स्थानीय प्रभावशाली नेताओं ने दबाव बनाकर चुनावी मैदान से हटने पर मजबूर कर दिया।

इस घटना के बाद से कल्याण के उत्तर भारतीय समाज में गहरी नाराजगी व्याप्त है। उत्तर भारतीय समाज कल्याण परिषद के संस्थापक एवं ट्रस्टी विजय पंडित ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि पार्टी के इस कृत्य का खामियाजा मतदान के दिन भुगतना होगा।

टिकट वितरण और नामांकन वापसी का पूरा विवाद

उल्लेखनीय है कि केडीएमसी क्षेत्र के कुल 122 वार्डों में भाजपा ने केवल दो उत्तर भारतीय चेहरों पर भरोसा जताया था। कल्याण (पूर्व) से मनोज राय की पत्नी सरोज राय और कल्याण (पश्चिम) के पैनल-7 (ड) से डॉ. पंकज उपाध्याय को टिकट दिया गया था। गठबंधन (युति) के तहत इस पैनल में भाजपा को तीन और शिवसेना (शिंदे गुट) को एक सीट मिली थी। नियमानुसार नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद, स्थानीय नेताओं ने डॉ. उपाध्याय पर दबाव बनाया और उनका फॉर्म जबरन वापस करा दिया। आरोप है कि स्थानीय नेता अब भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी के बजाय एक बागी उम्मीदवार का समर्थन कर रहे हैं।

उत्तर भारतीय समाज में बढ़ता आक्रोश

इस पूरे घटनाक्रम को उत्तर भारतीय समाज ने अपने प्रतिनिधित्व पर सीधे प्रहार के रूप में देखा है। विजय पंडित का कहना है कि भाजपा पहले ही उत्तर भारतीयों को टिकट देने में कतरा रही थी, और जब कड़ी मशक्कत के बाद दो टिकट मिले भी, तो उनमें से एक को साजिश के तहत छीन लिया गया। एक अन्य वरिष्ठ समाजसेवी ने इसे भाजपा द्वारा 'अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मारना' करार दिया है। समाज के लोगों का मानना है कि यदि उनके समाज के नेता को इस तरह अपमानित कर बैठाया जाएगा, तो वे चुनाव में भाजपा के पक्ष में मतदान करने पर पुनर्विचार करेंगे।

स्थानीय नेतृत्व की सफाई और पार्टी की साख पर सवाल

दूसरी ओर, भाजपा के एक वरिष्ठ स्थानीय नेता ने डैमेज कंट्रोल की कोशिश करते हुए बयान दिया है कि डॉ. उपाध्याय ने किसी दबाव में नहीं बल्कि 'दोस्ती-यारी' और आपसी तालमेल के चलते अपना नामांकन वापस लिया है। हालांकि, यह तर्क उत्तर भारतीय समाज के गले नहीं उतर रहा है। चर्चा है कि स्थानीय समीकरणों को साधने के चक्कर में पार्टी ने अपने ही कार्यकर्ताओं का मनोबल गिरा दिया है। अब देखना यह होगा कि उत्तर भारतीय मतदाताओं की यह नाराजगी आने वाले चुनाव परिणामों पर क्या असर डालती है और भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व इस अंतर्कलह को कैसे शांत करता है।

-कल्याण से नवभारत लाइव के लिए अशोक वर्मा की रिपोर्ट

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