

हजारों आदिवासियों का मार्च: श्रमजीवी संगठन ने संस्थापक विवेक भाऊ पंडित के नेतृत्व में भिवंडी से मंत्रालय की ओर संविधान अधिकार संघर्ष मोर्चा निकाला।
आंदोलनकारियों ने वर्षों से लंबित वन अधिकार दावों का तत्काल निपटारा करने और आदिवासी समुदाय को संवैधानिक व कानूनी अधिकार दिलाने की मांग की।
संगठन की अध्यक्ष सीता घाटाल ने आदिवासी विद्यार्थियों को 18 वर्ष की आयु तक मुफ्त, गुणवत्तापूर्ण और कौशल आधारित शिक्षा उपलब्ध कराने तथा प्रत्येक तालुका में विद्या संकुल स्थापित करने की मांग उठाई।
Bhiwandi Tribal Protest: आदिवासी समाज के मूलभूत अधिकारों, वन अधिकार के लंबित दावों के तत्काल निपटारे, शिक्षा और पेयजल जैसी बुनियादी समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर श्रमजीवी संगठन ने मंगलवार को भिवंडी से मंत्रालय की ओर ‘संविधान अधिकार संघर्ष मोर्चा’ निकाला। संगठन के संस्थापक विवेक भाऊ पंडित के नेतृत्व में निकाले गए इस मोर्चे में ठाणे, पालघर, रायगढ़ और नासिक जिलों से हजारों महिला और पुरुषों ने हिस्सा लिया।
संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि आजादी के आठ दशक पूरे होने के करीब पहुंचने के बावजूद आदिवासी समुदाय के लोगों को भोजन, शिक्षा और अपनी पहचान साबित करने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। आदिवासी समाज को उसके संवैधानिक और कानूनी अधिकार दिलाने के लिए सरकार से ठोस निर्णय लेने की मांग की गई।
मुंबई-नासिक महामार्ग पर हाईवे दिवे से दोपहर करीब दो बजे मोर्चे की शुरुआत हुई। इसका पहला पड़ाव खारीगांव में रखा गया। भिवंडी, शाहपुर, मुरबाड, कल्याण, अंबरनाथ, ठाणे, वसई, पालघर, डहाणू, तलासरी, विक्रमगढ़, वाडा, जव्हार और मोखाडा सहित विभिन्न क्षेत्रों से कार्यकर्ता सुबह से ही जुटने लगे थे।
श्रमजीवी संगठन की अध्यक्ष सीता घाटाल ने कहा कि आदिवासी विद्यार्थियों को 18 वर्ष की आयु तक गुणवत्तापूर्ण और कौशल आधारित शिक्षा मुफ्त उपलब्ध कराई जाए। इसके लिए प्रत्येक तालुका में विद्या संकुल स्थापित करने की मांग की गई है। इसके अलावा, आदिवासी समाज के वर्षों से लंबित वन अधिकार के दावों का तत्काल निपटारा करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई।
संगठन ने जल जीवन मिशन के तहत करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद कई योजनाओं के चालू नहीं होने का मुद्दा उठाया। संगठन का कहना है कि आज भी अनेक आदिवासी बस्तियों में महिलाओं को पानी के लिए परेशानी उठानी पड़ती है। इसलिए प्रत्येक वाड़ी और बस्ती में पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
संगठन के कार्याध्यक्ष बालाराम भोईर ने आरोप लगाया कि सरकार की ओर से सकारात्मक चर्चा तो होती है, लेकिन मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिए जाते। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक सरकार मांगों पर फैसला नहीं करती, तब तक आंदोलन जारी रखने का प्रयास किया जाएगा।
मोर्चे के दौरान यातायात बाधित होने और कानून-व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न होने से रोकने के लिए पुलिस ने व्यापक बंदोबस्त किया। पुलिस उपायुक्त डॉ. पवन बनसोड और यातायात विभाग के पुलिस उपायुक्त क्षीरसागर के नेतृत्व में करीब 250 पुलिस अधिकारी और कर्मचारी तैनात किए गए। मोर्चे के जरिए आदिवासी समाज के लंबित मुद्दों को सरकार तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है। अब इन मांगों पर सरकार क्या निर्णय लेती है, इस पर आंदोलनकारियों की नजरें टिकी हैं।