सीमित आय, बड़ा खर्च! MBMC का बजट 3,000 करोड़ की दहलीज पर?

MBMC budget 2026-27: मीरा-भाईंदर मनपा का 2026-27 का बजट लगभग 3,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने की तैयारी में है, जबकि अनुमानित आय 1,500 करोड़ रुपये के आसपास होने से वित्तीय संतुलन पर सवाल उठ रहे हैं।
Mira Bhayandar Municipal Corporation
MBMC 3000 crore budget (सोर्सः सोशल मीडिया)
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Mira Bhayandar Municipal Corporation: सीमित आय और बढ़ती वित्तीय चुनौतियों के बीच मीरा-भाईंदर मनपा का वर्ष 2026-27 का प्रशासनिक बजट इस बार रिकॉर्ड स्तर छूने की तैयारी में है। पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 305 करोड़ रुपये की वृद्धि के साथ बजट के 3,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, मनपा की वास्तविक आय लगभग 1,500 करोड़ रुपये के आसपास आंकी जा रही है, जिससे बजट के आंकड़ों को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।

मनपा का कार्यकाल 27 अगस्त 2022 को समाप्त होने के बाद प्रशासनिक व्यवस्था के तहत पिछले तीन वर्षों के बजट तैयार किए गए थे। अब प्रशासनिक कार्यकाल के अंतिम चरण में वर्ष 2026-27 का बजट तैयार कर आयुक्त राधाबिनोद शर्मा की अंतिम स्वीकृति के लिए भेजा गया है। बताया जा रहा है कि मंजूरी के बाद इसे स्थायी समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।

बजट में लगभग 305 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी का प्रस्ताव

सूत्रों के अनुसार, पिछले वर्ष जारी बजट 2,694 करोड़ 89 लाख 93 हजार रुपये था। इस वर्ष प्रशासन ने इसमें लगभग 305 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा है। यदि यह प्रस्ताव पारित होता है, तो कुल बजट करीब 3,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि 4 मार्च को स्थायी समिति के अध्यक्ष का चुनाव होने के बाद 6 मार्च तक बजट अनुमोदन के लिए पेश किया जा सकता है। यह भी अटकलें हैं कि स्थायी समिति द्वारा कुछ मदों में आंकड़े और बढ़ाए जा सकते हैं।

सरकारी अनुदान से लगभग 300 करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद

वित्तीय पक्ष पर नजर डालें तो मनपा की अनुमानित शुद्ध आय लगभग 1,500 करोड़ रुपये मानी जा रही है। इसमें संपत्ति कर से लगभग 300 करोड़ रुपये, विकास शुल्क से करीब 175 करोड़ रुपये, जल कर से लगभग 200 करोड़ रुपये तथा अन्य विभिन्न करों से कुल मिलाकर लगभग 1,300 करोड़ रुपये की आय शामिल है।

वहीं, सरकारी अनुदान से लगभग 300 करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है, जिसमें जीएसटी से करीब 200 करोड़ रुपये और स्टांप शुल्क अधिभार से लगभग 10 करोड़ रुपये शामिल हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब आय सीमित है तो बजट में यह अतिरिक्त वृद्धि किस आधार पर की जा रही है। अंतिम निर्णय अब आयुक्त की स्वीकृति और स्थायी समिति की मुहर पर निर्भर करेगा।

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