सोलापुर में 44°C की गर्मी के बीच पानी संकट गहराया, नगर निगम पर निकला महिलाओं का घागर मोर्चा
Solapur Water Crisis: सोलापुर में 44 डिग्री गर्मी के बीच पानी संकट गहराया है। महिलाओं का घागर मोर्चा नगर निगम पर निकाला गया। जिसके बाद पानी स्टोरेज और सप्लाई को लेकर सख्त योजना लागू की जा रही है।
- Written By: आंचल लोखंडे
Solapur Water Crisis (सोर्सः सोशल मीडिया)
Solapur Ghagar Morcha Protest: गर्मी का तापमान 44 डिग्री तक पहुंचते ही सोलापुरकरों की पानी की समस्या और गंभीर हो गई है। सोमवार (20 अप्रैल) को वार्ड 11 की महिलाओं ने पानी की कमी के विरोध में नगर निगम में ‘घागर मोर्चा’ निकाला और प्रशासन के खिलाफ अपना कड़ा गुस्सा जाहिर किया। खास बात यह रही कि इस मार्च में सत्ताधारी BJP के पार्षद भी शामिल हुए, जिससे राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है।
सोलापुर शहर के कई हिस्सों में सात-आठ दिन बाद भी पानी की सप्लाई नहीं होने से लोग परेशान हैं। प्रदर्शन कर रही महिलाओं ने नगर निगम प्रशासन पर आरोप लगाया कि बढ़ती गर्मी के कारण पानी की मांग बहुत अधिक बढ़ गई है, फिर भी प्रशासन निष्क्रिय बना हुआ है। हाथों में खाली घड़े लिए महिलाएं नारे लगाते हुए नगर निगम की ओर बढ़ीं। “पानी दो, पानी दो; नहीं तो कुर्सियां खाली करो” के नारे पूरे इलाके में गूंजते रहे।
प्रशासन के खिलाफ नाराजगी
इस बीच, नगर निगम हॉल में 1,400 करोड़ रुपये की पानी सप्लाई योजना पर प्रेजेंटेशन और चर्चा चल रही थी, जबकि बाहर लोगों का गुस्सा देखने को मिला। एक तरफ करोड़ों की योजना पर चर्चा हो रही थी और दूसरी तरफ महिलाएं पानी के लिए संघर्ष कर रही थीं। यह एक बड़ा विरोधाभास सामने आया। सत्ताधारी BJP के पार्षदों ने भी इस मार्च में हिस्सा लिया और प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई।
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नगर निगम के खिलाफ विरोध प्रदर्शन
उन्होंने संबंधित अधिकारियों को आड़े हाथों लेते हुए आरोप लगाया कि प्रशासन नियमित पानी सप्लाई देने में विफल रहा है। “पिछले आठ-दस दिनों से वार्ड में पानी नहीं आया है। इस बारे में पूछने पर जोन अधिकारियों और पब्लिक हेल्थ इंजीनियरों से गोलमोल जवाब मिलता है। इससे परेशान होकर महिलाओं ने नगर निगम के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।”क्या पुणे शहर में पानी की कमी हो रही है?
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मौसम विभाग ने अनुमान लगाया है कि इस वर्ष एल नीनो और IOD के प्रभाव से मानसून कमजोर रह सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने पीने के पानी की सख्त योजना बनाने के निर्देश दिए हैं। पुणे में जल संसाधन और सिंचाई विभाग ने इस दिशा में कदम उठाना शुरू कर दिया है।
पानी की मांग लगातार बढ़ रही
इस साल पहली बार बांधों में पानी का स्टोरेज जून के बजाय सीधे 31 अगस्त तक सुरक्षित रखने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। पुणे शहर को पानी सप्लाई करने वाले चार प्रमुख बांध खड़कवासला, पानशेत, वरसगांव और टेमघर में जल प्रबंधन अधिक सख्ती से किया जा रहा है। बढ़ती आबादी और प्रवासियों की संख्या में वृद्धि के कारण शहर में पीने के पानी की मांग लगातार बढ़ रही है। इसलिए उपलब्ध जल भंडारण का सही उपयोग और दीर्घकालिक योजना बनाना बेहद आवश्यक हो गया है।
