BJP को झटका: सोलापुर नगर निगम चुनाव में शिंदे-अजित पवार गुट का गठबंधन

Eknath Shinde-Ajit Pawar Alliance: सोलापुर नगर निगम चुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक उलटफेर हुआ है, जहां एकनाथ शिंदे गुट ने BJP से दूरी बनाते हुए अजित पवार गुट के साथ 50-50 सीटों पर गठबंधन कर लिया है।
BMC Election 2026
बीएमसी चुनाव 2026 (सौ. सोशल मीडिया )
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Solapur Municipal Election: सोलापुर नगर निगम चुनावों के बैकग्राउंड में राजनीतिक समीकरण तेज़ी से बदल रहे हैं। BJP से उम्मीद के मुताबिक सीटें न मिलने के बाद शिवसेना के एकनाथ शिंदे गुट ने आक्रामक रुख अपनाते हुए नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी के अजित पवार गुट के साथ गठबंधन कर लिया है। दोनों दलों के बीच 50-50 प्रतिशत सीटों पर सहमति बनी है। इसके चलते अब BJP के पास अकेले चुनाव लड़ने का विकल्प बचा है।

रविवार दोपहर हुई अहम बैठक में शिंदे गुट ने BJP को बड़ा झटका देते हुए सीधे NCP अजित पवार गुट से हाथ मिला लिया। बैठक में तय हुआ कि आगामी नगर निगम चुनाव 50 प्रतिशत सीट शेयरिंग फॉर्मूले पर लड़े जाएंगे। कुल 102 सीटों में से दोनों गुटों को 51-51 सीटें मिलेंगी। हर वार्ड में राजनीतिक ताकत, स्थानीय समीकरण और पार्टी की पकड़ के आधार पर उम्मीदवार तय किए जाएंगे।

रविवार को सोलापुर के एक होटल में हुई बैठक

शिंदे गुट और NCP अजित पवार गुट की यह बैठक रविवार को सोलापुर के एक होटल में हुई। शिंदे गुट की ओर से पूर्व मंत्री सिद्धराम म्हेत्रे, उत्तम प्रकाश खंडारे, जिला प्रमुख अमोल शिंदे, मनीष काजले, अमर पाटिल, शहर अध्यक्ष सचिन जाधव, महेश साठे और मनोज शेजवाल मौजूद थे। वहीं, NCP अजित पवार गुट की ओर से शहर अध्यक्ष संतोष पवार, कार्यकारी अध्यक्ष जुबेर बागवान, सुधीर खराटमल, आनंद चंदनशिवे और यू.एन. बेरिया उपस्थित रहे।

किए जाएंगे AB फॉर्म वितरित

बैठक में किसी भी सूरत में BJP के खिलाफ चुनाव लड़ने और महापौर पद पर शिंदे गुट-अजित पवार गुट का उम्मीदवार बैठाने का संकल्प लिया गया। वार्ड-वार सीट बंटवारे पर अंतिम निर्णय सोमवार को होने की संभावना है, जिसके बाद AB फॉर्म वितरित किए जाएंगे।

गठबंधन का फैसला

शिवसेना एकनाथ शिंदे गुट नेता सिद्धराम म्हेत्रे ने कहा कि BJP से सम्मानजनक सीटें न मिलने के कारण शिंदे गुट में नाराज़गी थी। शिवसेना ने पहले 45, फिर 35 सीटों का प्रस्ताव दिया था। यहां तक कि 26 सीटें मिलने पर भी चुनाव लड़ने की तैयारी थी, लेकिन BJP ने सीट बंटवारे में शिवसेना को नज़रअंदाज़ किया। इसी वजह से अजित पवार गुट के साथ गठबंधन का फैसला किया गया।

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