Solapur News: ‘आधे इधर, आधे उधर, तो शिवसेना बची किधर’, नगर निगम चुनाव में दोनों की राह मुश्किल
ऐतिहासिक बॉलीवुड फिल्म शोले में असरानी का एक मशहूर डायलॉग है। आधे इधर जाओ...आधे उधर जाओ...बाकी मेरे पीछे आओ...यह डायलॉग सोलापुर में शिवसेना पर सटीक बैठ रहा है।
- Written By: आंचल लोखंडे
'आधे इधर, आधे उधर, तो शिवसेना बची किधर' (सौजन्यः सोशल मीडिया)
सोलापूर: ऐतिहासिक बॉलीवुड फिल्म शोले में असरानी का एक मशहूर डायलॉग है। आधे इधर जाओ…आधे उधर जाओ…बाकी मेरे पीछे आओ…यह डायलॉग सोलापुर में शिवसेना पर सटीक बैठ रहा है। नगर निगम चुनाव की पृष्ठभूमि में शिवसेना के नगरसेवकों की समीक्षा में पता चलता है कि शिवसेना के विभाजन के बाद आधे नगरसेवक उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के पीछे चले गए। कुछ नगरसेवक ए. विजय कुमार देशमुख के नेतृत्व में भाजपा में शामिल हो गए। शेष नगरसेवक उद्धव बालासाहेब ठाकरे की शिवसेना में हैं।
जिले में शिवसेना का खासा प्रभाव था। एक समय में इसके 4 विधायक थे। लेकिन मनपा के सभागृह में सदस्यों की संख्या कभी 2 अंकों तक नहीं पहुंची। पिछले मनपा चुनाव में दिवंगत महेश कोठे जैसे मजबूत नेतृत्व के कारण शिवसेना के नगरसेवकों की संख्या बढ़कर 21 हो गई थी। कुल 5 वार्डों में शिवसेना का करिश्मा देखने को मिला था।
स्वीकृत नगरसेवकों की थी फौज
वार्ड 6 से गणेश वानकर, मनोज शेजवाल, वत्सला बरगंडे, ज्योति खटके, वार्ड 7 से देवेन्द्र कोठे, अमोल शिंदे, मंदाकिनी पवार, सारिका पिसे, वार्ड 10 से प्रथमेश कोठे, विट्ठल कोटा, मीरा गुर्रम, सावित्री सामल, वार्ड 11 से स्वर्गीय महेश कोठे, राजकुमार हंचटे, अनिता मगर, कुमुद अंकराम को शिवसेना नगरसेवक चुना गया। शिवसेना के उम्मीदवार कई दिग्गज और पूर्व नगरसेवकों को हराकर नगर निगम में पहुंचे थे। शिवसेना के पास वार्ड 12 से विनायक कोंड्याल, वार्ड 17 से भरत बदुरवाले, वार्ड 19 से गुरुशांत धुतरगांवकर, वार्ड 22 से उमेश गायकवाड़, लक्ष्मण जाधव और शशिकांत कैंची जैसे स्वीकृत नगरसेवकों की फौज थी।
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दोनों शिवसेना की राह बहुत कठिन
मनपा में पहली बार विपक्ष नेता का पद भी शिवसेना को मिला है। दिवंगत महेश कोठे और अमोल शिंदे ने मनपा में सक्षम विपक्ष नेता की भूमिका निभाई और सत्ता पक्ष पर अच्छी नजर रखी। आगामी मनपा चुनाव की पृष्ठभूमि में शिवसेना की समीक्षा करने पर पता चला कि 21 नगरसेवकों में से केवल 3 नगरसेवक गणेश वानकर, भरत बदुरवाले और लक्ष्मण जाधव ही उद्धव बालासाहेब ठाकरे की शिवसेना में हैं। 2 नगरसेवक महेश कोठे और वत्सला बरगंडे का निधन हो चुका है। गुरुशांत धुतरगांवकर राजनीति से संन्यास ले चुके हैं। ऐसा लगता है कि दोनों शिवसेना की राह बहुत कठिन है।
कुछ नगरसेवक भाजपा में शामिल हुए
देवेंद्र कोठे भाजपा में शामिल होकर शहर मध्य विधानसभा क्षेत्र से विधायक बन गए हैं। उनके साथ विनायक कोंड्याल भी भाजपा में शामिल हो गए हैं। इसके अलावा राजकुमार हंचटे, अनिता मगर विधायक विजयकुमार देशमुख के नेतृत्व में भाजपा में शामिल हुए। जबकि सारिका पवार, मंदाकिनी पवार, ज्योति खटके राजनीति में ज्यादा सक्रिय नहीं दिख रही हैं।
महायुति के जरिए लड़ेंगे चुनाव
राज्य में शिवसेना में हुई फूट के बाद शिवसेना के नगरसेवकों में भी फूट पड़ गई है। शिवसेना के अमोल शिंदे, मनोज शेजवाल, उमेश गायकवाड़ उपमुख्यमंत्री शिंदे गुट से अलग होकर महायुति में शामिल हो गए हैं। आगामी नगर निगम चुनाव महायुति के जरिए लड़ने की संभावना है।
सक्षम नेतृत्व का अभाव
शिवसेना में इस समय ऐसा कोई नहीं है जो मनपा चुनाव का सक्षम नेतृत्व कर सके। महाविकास आघाड़ी से मतभेद के कारण शिवसेना अलग हो गई है। चुनाव की पृष्ठभूमि में महानगरपालिका महापौर पद पर नियुक्त पदाधिकारियों को लेकर पार्टी में असंतोष है। परिणामस्वरूप, सक्षम नेतृत्व के अभाव में इस वर्ष मनपा चुनाव में शिवसेना को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।
प्रथमेश कोठे के फैसले पर ध्यान
प्रथमेश कोठे, विट्ठल कोठे, मीरा गुर्रम, सावित्री सामल, कुमुद अंकाराम एनसीपी शरद चंद्र पवार पार्टी में हैं। हालाँकि, नगर निगम चुनावों की पृष्ठभूमि में, प्रथमेश कोठे जो निर्णय लेंगे, उसमें इन नगरसेवकों की हिस्सेदारी होगी।
