‘मराठी भाषा भी कोई मुद्दा है’, हिंदी विवाद पर भड़के अबू आजमी, बोले- फालतू बात करते है लोग
महाराष्ट्र में इस समय भाषा विवाद चरम पर है। इस विवाद को महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने अपना मुद्दा बना लिया है। इस विवाद पर समाजवादी पार्टी नेता अबू आजमी ने अपनी प्रतिक्रिया दी और भाषा का महत्व समझाया।
- Written By: प्रिया जैस
अबू आजमी (सौजन्य-सोशल मीडिया)
सोलापुर: राज्य की स्कूलों में प्राथमिक स्तर से हिंदी पढ़ाने के निर्णय के बाद मराठी भाषा का मुद्दा गरमा गया है और प्राथमिक स्तर से हिंदी पढ़ाने का कड़ा विरोध हो रहा है। इस मुद्दे को महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने काफी जोरो-शोरो से उठाया है। इस भाषा के मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए अब समाजवादी पार्टी नेता अबू आजमी ने बड़ा बयान दिया है।
भाषा विवाद पर बोलते हुए अबू आजमी ने कहा, “मराठी मुद्दा कोई मुद्दा है क्या? फालतू बात करते है लोग। महाराष्ट्र में रहने वाले हर व्यक्ति मराठी भाषा से प्यार करता है। किसी को भी मराठी से कोई नफरत नहीं हैं।” अबू आजमी ने कहा कि हर राज्य की एक भाषा होनी चाहिए। लेकिन एक भाषा होनी चाहिए, जो कश्मीर से कन्याकुमारी तक एक हो और उसका सम्मान होना चाहिए।
भाषा मुद्दे पर भड़के अबू आजमी
अबू आजमी ने कहा, “यहां तक कि राज्य की भाषा का भी सम्मान किया जाना चाहिए।” उन्होंने आगे कहा कि संसद में भाषा के लिए समर्पित 45 सदस्यों वाली एक समिति है। वे पूरे भारत में जाकर लोगों को हिंदी में काम करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। केन्द्र सरकार का सम्पूर्ण कार्य हिन्दी में होता है।
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आज सोलापुर, महाराष्ट्र में पत्रकार परिषद को संबोधन – 2#SamajwadiParty #Solapur #Maharashtra #AbuAsimAzmi #Osmanabad #Tuljapur #AkhileshYadav #Dharashiv #PDA pic.twitter.com/G5o20GRGPl — Abu Asim Azmi (@abuasimazmi) June 22, 2025
महाराष्ट्र में यदि तीन भाषाएं हों तो पहली मराठी होनी चाहिए। दूसरी भाषा हिंदी और फिर अंग्रेजी होनी चाहिए। आजमी ने इस बार भी यह सवाल उठाया और कहा अगर महाराष्ट्र में हिंदी तीसरी भाषा नहीं है तो आप मुझे बताइए कि कौन सी भाषा का उपयोग किया जाना चाहिए?
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मनसे, ठाकरे गुट गठबंधन वार्ता पर प्रतिक्रिया
इस बीच, उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के बीच गठबंधन को लेकर भी चर्चाएं तेज है। ठाकरे बंधुओं के गठबंधन की चर्चाओं पर अबू आजमी ने भी प्रतिक्रिया दी है। यदि वे एक ही घर में पैदा हुए होते, तो वे एक साथ रहते, और हम इस बात से खुश हैं। राज ठाकरे के पास कोई ताकत नहीं है, वह केवल नफरत की राजनीति करते हैं। आजमी ने कहा है कि उत्तर भारतीयों और हिंदी के खिलाफ रोज बोलना उनका पेशा है।
