महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला, अब सरकारी उत्सव के रूप में मनाई जाएगी अजित पवार की जयंती
Ajit Pawar Jayanti: महाराष्ट्र सरकार ने अजित पवार की जयंती को सरकारी उत्सव के रूप में मनाने का बड़ा फैसला किया है। इस निर्णय पर सुप्रिया सुले ने भावुक होते हुए उनकी अंतिम इच्छा का राज खोला है।
- Written By: गोरक्ष पोफली
अजित पवार (सोर्स: सोशल मीडिया)
Maharashtra Govt Announces Ajit Pawar Jayanti As State Festival: महाराष्ट्र की राजनीति के कद्दावर नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री स्वर्गीय अजित पवार की विरासत को सम्मानित करने के लिए राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। कुछ महीनों पहले एक दुखद विमान दुर्घटना में जान गंवाने वाले दादा की जयंती, जो 22 जुलाई को आती है, अब आधिकारिक तौर पर सरकारी स्तर पर मनाई जाएगी। इस संबंध में राज्य सरकार द्वारा जीआर भी जारी कर दिया गया है।
इस फैसले के पीछे राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की सक्रिय भूमिका रही है। अन्न व नागरिक आपूर्ति मंत्री छगन भुजबल और चिकित्सा शिक्षा मंत्री हसन मुश्रीफ ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से लिखित रूप में यह मांग की थी कि अजित दादा के योगदान को देखते हुए उनकी जयंती को सरकारी कार्यक्रमों की सूची में शामिल किया जाए। सरकार ने इस मांग को तत्काल स्वीकार करते हुए सामान्य प्रशासन विभाग के माध्यम से आदेश जारी कर दिए।
क्या कहता है आदेश ?
आदेश के अनुसार, 22 जुलाई 2026 को मंत्रालय सहित राज्य के सभी सरकारी और अर्ध-सरकारी कार्यालयों, स्कूलों और कॉलेजों में अजित पवार की प्रतिमा पर पुष्पहार अर्पित कर उन्हें अभिवादन किया जाएगा। यह निर्णय महाराष्ट्र के विकास और बुनियादी ढांचे के निर्माण में उनके द्वारा दिए गए अभूतपूर्व योगदान को एक बड़ी श्रद्धांजलि माना जा रहा है।
सम्बंधित ख़बरें
लोकल यात्री ध्यान दें! हार्बर लाइन पर चार दिनों तक रहेगा रात्रिकालीन ब्लॉक, वडाला रोड तक ही चलेंगी कुछ ट्रेनें
महाराष्ट्र को कौशल संपन्न बनाने की तैयारी, स्किल फर्स्ट पैटर्न के जरिए प्रशिक्षण, उद्योग और रोजगार को मिला मंच
कर्जमाफी पर सीएम फडणवीस का सम्मान, रवींद्र चव्हाण बोले- संकट में किसानों के साथ खड़ी है सरकार
पटरी पर लौटी रफ्तार! दक्षिण-पूर्व घाट पर फिर दौड़ेगी डेक्कन क्वीन और इंटरसिटी एक्सप्रेस, देखें रेलवे का अपडेट
प्रशासन पर मजबूत पकड़ और दादा का नाम
अजित पवार को उनकी कार्यशैली और प्रशासन पर जबरदस्त पकड़ के लिए जाना जाता था। जनमानस में उन्हें ‘दादा’ के रूप में जो स्थान मिला, वह उनकी लोककल्याणकारी योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने की उनकी जिद का परिणाम था। सरकार का मानना है कि उनकी जयंती को आधिकारिक दर्जा देना उनके अविरत सेवा भाव का सम्मान है।
सुप्रिया सुले का बड़ा खुलासा: भाई की आखिरी इच्छा
इस सरकारी सम्मान के बीच, अजित पवार की बहन और एनसीपी एसपी की नेता सुप्रिया सुले ने एक अत्यंत भावुक खुलासा किया है। सुले ने हाल ही में स्पष्ट किया कि जब तक उनके भाई जीवित थे, तब तक संवाद के द्वार 100 प्रतिशत खुले थे। उन्होंने एक बड़ा राज खोलते हुए बताया कि उनके भाई की आखिरी इच्छा थी कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के दोनों गुट फिर से एक साथ आएं और मिलकर काम करें।
सुप्रिया सुले ने कहा, क्या यह सच है कि मेरे भाई की अंतिम इच्छा थी कि हम सब साथ आएं? हां, यह सच था। वह चाहते थे कि दोनों राकांपा साथ रहें। दुर्भाग्य से, उनका निधन हो गया। उनके इस बयान ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है कि क्या दादा के जाने के बाद वह संवाद भी हमेशा के लिए थम गया है।
यह भी पढ़ें: लोकल यात्री ध्यान दें! हार्बर लाइन पर चार दिनों तक रहेगा रात्रिकालीन ब्लॉक, वडाला रोड तक ही चलेंगी कुछ ट्रेनें
अजित पवार के समर्थकों में खुशी की लहर
अजित पवार की जयंती को सरकारी मान्यता मिलने से उनके समर्थकों में खुशी की लहर है, वहीं सुप्रिया सुले द्वारा साझा की गई उनकी अंतिम इच्छा महाराष्ट्र की राजनीति में एक भावनात्मक मोड़ ले आई है। अब हर साल 22 जुलाई को पूरा महाराष्ट्र न केवल एक कुशल प्रशासक को याद करेगा, बल्कि उस अधूरी इच्छा की टीस भी राजनीतिक गलियारों में महसूस की जाएगी।
