मलकापुर में भाजपा के सामने कड़ी चुनौती! एकछत्र सत्ता का सपना धुंधला, मैदान में समविचारी दल

Malakapur political developments: मलकापुर नगरपालिका चुनाव में भाजपा को कांग्रेस व एनसीपी अजित पवार गुट से कड़ी चुनौती। आंतरिक नाराजगी, नए इनकमिंग और बदलते राजनीतिक समीकरण नज़र आ रहे है।
मलकापुर में भाजपा के सामने कड़ी चुनौती!
मलकापुर में भाजपा के सामने कड़ी चुनौती! (सौजन्यः सोशल मीडिया)
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Malakapur Municipal Election: मलकापुर नगर परिषद चुनावों की पृष्ठभूमि पर भारतीय जनता पार्टी में बड़े पैमाने पर हुए "इनकमिंग" (नए कार्यकर्ताओं के आगमन) से भले ही पार्टी की ताकत बढ़ी हो, लेकिन कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस (अजित पवार गुट) सहित समविचारी समूहों ने खड़ी की हुई राजनीतिक चुनौती को देखते हुए भाजपा का एकछत्र सत्ता हासिल करने का सपना धुंधला होता दिखाई दे रहा है।

हाल ही में पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण के कट्टर समर्थक और मलकापुर के पूर्व उपनगराध्यक्ष मनोहर शिंदे ने भाजपा में प्रवेश करने की घोषणा की थी। इसके बाद भाजपा के जिलाध्यक्ष एवं विधायक डॉ. अतुल भोसले ने उनका औपचारिक स्वागत किया। इससे ऐसा वातावरण बना था कि मलकापुर में भाजपा का झंडा निश्चित रूप से लहराने वाला है।

समीकरणों में नई उथलपुथल

मगर कांग्रेस और राष्ट्रवादी अजित पवार गुट की सक्रिय राजनीतिक हलचलों के चलते समीकरणों में नई उथलपुथल शुरू हो गई है। कांग्रेस शहर अध्यक्ष एड. अमित जाधव ने घोषणा की है कि मलकापुर नगर परिषद का चुनाव पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण के नेतृत्व में विकास के मुद्दों पर जोरदार तरीके से लड़ा जाएगा। वहीं राष्ट्रवादी अजित पवार गुट के नेता उदयसिंह पाटील-उंडालकर के नेतृत्व में भी नगर परिषद चुनाव की तैयारी तेज है।

अशोकराव थोरात महाआघाड़ी के साथ जाएंगे?

इसी बीच वरिष्ठ नेता अशोकराव थोरात ने अभी तक अपनी भूमिका स्पष्ट नहीं की है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि वे कांग्रेस-राष्ट्रवादी पवार गुट के साथ ही रहेंगे। इन सभी हलचलों से स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि मलकापुर में भाजपा के सामने एक मजबूत चुनौती खड़ी होने वाली है।

भाजपा के मूल पदाधिकारियों में नाराजगी?

भाजपा में बड़ी संख्या में नए लोगों के आने से पार्टी की शक्ति भले ही बढ़ी हो, लेकिन पुराने कार्यकर्ताओं में असंतोष बढ़ गया है। नवागतों को मिल रहे महत्व को देखते हुए पार्टी के मूल पदाधिकारियों में नाराजगी का माहौल बताया जा रहा है। इसलिए यह भी सवाल उठा है कि यह इनकमिंग भाजपा को फायदा पहुंचाएगी या उलटा नुकसान इस पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

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