Akkalkot Hailstorm Crop Damage (फोटो क्रेडिट-X)
Akkalkot Hailstorm Crop Damage: महाराष्ट्र के सोलापुर जिले में कुदरत का कहर टूट पड़ा है, जहाँ बेमौसम बारिश और भीषण ओलावृष्टि ने किसानों की साल भर की मेहनत पर पानी फेर दिया है। विशेष रूप से अक्कलकोट तालुका में मंगलवार 17 मार्च की दोपहर के बाद मौसम ने ऐसा पलटा खाया कि चारों ओर बर्फ की सफेद चादर बिछ गई। आसमान से बरसी इस आफत ने सांगवी बुद्रुक और खवास जैसे गांवों में कृषि भूमि को भारी नुकसान पहुँचाया है। मौसम विभाग ने पहले ही राज्य के कई जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया था, लेकिन अक्कलकोट में हुई ओलावृष्टि की तीव्रता ने प्रशासन और किसानों दोनों को हैरान कर दिया है। वर्तमान में रबी फसलों की कटाई का समय चल रहा है, ऐसे में इस प्राकृतिक आपदा ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था की कमर तोड़कर रख दी है।
सोलापुर जिले में इस बेमौसम बदलाव के कारण अंगूर, गेहूं और ज्वार की फसलों को सबसे अधिक क्षति पहुँची है। अंगूर के बागों में ओले गिरने से फल फट गए हैं, जिससे निर्यात और स्थानीय बाजार दोनों के लिए तैयार माल बर्बाद हो गया है। किसानों का कहना है कि इस साल पहले से ही खाद और बीजों की कीमतों में हुई वृद्धि के कारण वे कर्ज के बोझ तले दबे थे, और अब इस बारिश ने उनकी उम्मीदों को पूरी तरह धराशायी कर दिया है। ओलावृष्टि इतनी जबरदस्त थी कि खेतों में खड़ी फसलें जमीन पर बिछ गई हैं। मौसम विभाग (IMD) ने चेतावनी दी है कि अगले तीन दिनों तक जिले में स्थिति ऐसी ही बनी रह सकती है, जिससे किसानों की चिंताएं और अधिक बढ़ गई हैं।
अक्कलकोट तालुका में हुई ओलावृष्टि ने विशेष रूप से अंगूर उत्पादक किसानों को बड़ा झटका दिया है। अंगूर की फसल अपनी परिपक्वता के अंतिम चरण में थी, लेकिन ओलों की मार ने फलों को पेड़ पर ही नष्ट कर दिया है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार ओलों के गिरने से फलों की गुणवत्ता खराब हो जाती है और उनमें फंगस लगने का डर बढ़ जाता है। किसान अब सरकार से तत्काल पंचनामा कर मुआवजे की मांग कर रहे हैं ताकि वे इस भारी आर्थिक नुकसान से उबर सकें।
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गेहूं और ज्वार जैसी रबी फसलों के लिए भी यह समय अत्यंत महत्वपूर्ण था क्योंकि अधिकांश क्षेत्रों में कटाई शुरू हो चुकी थी। बेमौसम बारिश के कारण अनाज भीग गया है, जिससे उसकी चमक कम हो जाएगी और बाजार में सही दाम मिलना मुश्किल होगा। सोलापुर के किसान पहले से ही बदलती जलवायु और बढ़ती लागत से जूझ रहे हैं, ऐसे में इस प्राकृतिक आपदा ने उनकी आजीविका पर सीधा प्रहार किया है। ग्रामीण क्षेत्रों में कई जगहों पर बिजली गिरने की घटनाएं भी सामने आई हैं, जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।
भारतीय मौसम विभाग ने सोलापुर सहित पश्चिम महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों के लिए अगले 72 घंटों का येलो अलर्ट बरकरार रखा है। प्रशासन ने किसानों को सलाह दी है कि वे कटी हुई फसलों को सुरक्षित स्थानों पर रखें और बिजली चमकने के दौरान पेड़ों के नीचे शरण न लें। तालुका स्तर के अधिकारियों को ओलावृष्टि प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि नुकसान का प्रारंभिक आकलन किया जा सके। लगातार बदलते वैश्विक तापमान का असर अब महाराष्ट्र के इन कृषि प्रधान क्षेत्रों में बार-बार दिखने वाली प्राकृतिक आपदाओं के रूप में सामने आ रहा है।