Tushar Doshi SP Satara ZP Election (फोटो क्रेडिट-X)
Tushar Doshi SP Satara Suspension Order: महाराष्ट्र की राजनीति में सोमवार का दिन ‘सातारा जिला परिषद’ विवाद के नाम रहा। विधानमंडल में मचे भारी हंगामे के बाद सातारा के पुलिस अधीक्षक (SP) तुषार दोशी के निलंबन का आदेश दिया गया है। हालांकि, इस पूरे मामले में एक ऐसा संवैधानिक पेच (ट्विस्ट) फंसा है, जिससे निलंबन पर सस्पेंस बरकरार है।
यहाँ जानिए इस हाई-प्रोफाइल विवाद की हर एक कड़ी:
सातारा जिला परिषद के अध्यक्ष पद के चुनाव के दौरान शिवसेना (शिंदे गुट) और बीजेपी के बीच वर्चस्व की लड़ाई सड़क पर आ गई। शिवसेना-NCP गठबंधन के पास 35 सीटें थीं, जबकि बीजेपी के पास केवल 27। पुलिस पर क्या आरोप है? मंत्री शंभूराज देसाई का आरोप है कि चुनाव से ठीक पहले पुलिस ने उनके दो सदस्यों को ‘पुराने मामलों’ में हिरासत में ले लिया ताकि वे वोट न दे सकें। देसाई ने दावा किया कि जब वे सदस्यों को छुड़ाने गए, तो 10-10 पुलिसकर्मियों ने उनके साथ बदसलूकी की, जिससे उन्हें और मकरंद पाटील को चोटें आईं।
ये भी पढ़ें- मुसलमानों का सड़कों पर चलना मुश्किल, अबू आजमी ने सीएम फडणवीस से विधान भवन में की ये मांग
विधान परिषद में जब शंभूराज देसाई ने अपनी आपबीती सुनाई, तो सदन में भारी आक्रोश देखने को मिला। इसके बाद घटनाक्रम कुछ इस तरह बदला, उपसभापति ने कड़ा रुख दिखाया। विधान परिषद की उपसभापति नीलम गोऱ्हे ने घटना को लोकतंत्र का अपमान बताते हुए तुरंत SP तुषार दोशी को निलंबित करने और पूरे मामले की विभागीय आयुक्त से जांच कराने का आदेश दिया।
मामले में ट्विस्ट: जैसे ही निलंबन का आदेश आया, बीजेपी विधायक और मंत्री जयकुमार गोरे ने इसका कड़ा विरोध किया। इसके तुरंत बाद विधान परिषद के सभापति राम शिंदे ने उपसभापति के इस फैसले को ‘रिजर्व’ (सुरक्षित) रख लिया। इसका मतलब क्या है? तकनीकी रूप से, जब तक सभापति अपना अंतिम फैसला नहीं सुनाते, तब तक एसपी का निलंबन प्रभावी नहीं माना जाएगा। यानी आदेश तो दिया गया, लेकिन वह फिलहाल ‘होल्ड’ पर है।
इस मुद्दे की गूंज विधानसभा में भी सुनाई दी, जहाँ महायुति के दो बड़े नेताओं के बयानों में अंतर दिखा, एकनाथ शिंदे ने साफ कहा कि किसी भी सदस्य को मतदान से रोकना लोकतंत्र की हत्या है। उन्होंने खुद एसपी को फोन किया था, फिर भी आदेश नहीं माना गया। देवेंद्र फडणवीस ने मामले को शांत करने की कोशिश करते हुए कहा कि “तथ्यों की जांच की जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उस पर कार्रवाई होगी।”
इतने हंगामे के बावजूद, चुनाव परिणाम बीजेपी के पक्ष में रहा। बीजेपी ने शिवसेना के 2 और राष्ट्रवादी के 3 सदस्यों को अपने पाले में कर लिया। नतीजतन, कम सीटें होने के बावजूद भाजपा का अध्यक्ष चुन लिया गया। शिवसेना (शिंदे गुट) इसे अपनी नैतिक हार और पुलिस की साजिश मान रही है।