Shahu Maharaj Statement: शिवसेना (शिंदे गुट) के विधायक संजय गायकवाड़ की जुबान एक बार फिर उनके लिए गले की हड्डी बन गई है। 'शिवाजी कौन था?' (Shivaji Kon Hota) पुस्तक के पब्लिशर प्रशांत आंबी को फोन पर दी गई कथित धमकी और गंदी गालियों के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में आक्रोश की लहर दौड़ गई है। कोल्हापुर के राजारामपुरी पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज होने के बाद अब दिग्गज नेताओं ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से गायकवाड़ को विधायक पद से हटाने की मांग की है।
कोल्हापुर के सांसद और मराठा साम्राज्य के वंशज छत्रपति शाहू महाराज ने इस मामले में कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि जनता इस तरह की गुंडागर्दी और अभद्र भाषा को बर्दाश्त नहीं करेगी। गायकवाड़ को यह समझना चाहिए कि सार्वजनिक जीवन में किससे और कैसे बात की जाती है। हालांकि मुझे बर्खास्तगी के तकनीकी नियमों की जानकारी नहीं है, लेकिन उनके बढ़ते कारनामों को देखते हुए उनके खिलाफ कठोर एक्शन लेना अनिवार्य हो गया है।
राकांपा (सपा) विधायक रोहित पवार ने इस मुद्दे पर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि विधायक गायकवाड़ ने न केवल प्रशांत आंबी की माता-पत्नी को लेकर शर्मनाक शब्द कहे, बल्कि गोविंद पानसरे और छत्रपति शिवाजी महाराज के विचारों का भी अपमान किया। रोहित पवार ने घोषणा की है कि 28 अप्रैल को बुलढाणा में विधायक गायकवाड़ के घर के सामने बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा। इस दौरान प्रदर्शनकारी शांतिपूर्ण तरीके से 'शिवाजी कौन था?' किताब का पाठ करेंगे। पवार ने तीखा सवाल किया, "नारी सम्मान की बात करने वाली पार्टी के शासन में 24 अप्रैल तक FIR दर्ज करने में इतनी देरी क्यों हुई? क्या सरकार अपने विधायक को बचा रही है?"
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने भी इस मामले में सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि गायकवाड़ की भाषा न केवल गंदी है, बल्कि उनकी आपराधिक मानसिकता को दर्शाती है। सपकाल ने सवाल उठाया कि गोविंद पानसरे की हत्या पर टिप्पणी करने वाले ऐसे विधायक पर मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस कार्रवाई करने से क्यों कतरा रहे हैं?
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चारों तरफ से घिरने और चौतरफा हमले के बाद विधायक संजय गायकवाड़ अब रक्षात्मक मुद्रा में नजर आ रहे हैं। उन्होंने पब्लिशर के साथ की गई गाली-गलौज की घटना पर अफसोस जताया है। हालांकि, उन्होंने अपना बचाव करते हुए यह भी कहा कि उनका इरादा केवल यह सुनिश्चित करना था कि छत्रपति शिवाजी महाराज का जिक्र हमेशा सम्मान के साथ किया जाए।