रायगढ़ NCP बैनर: अजित पवार और सुनेत्रा पवार के फोटो गायब, क्या तटकरे परिवार ने शुरू किया विद्रोह?
Raigad NCP Banner Controversy: रायगढ़ में एनसीपी के बैनर से अजित पवार और सुनेत्रा पवार की तस्वीरें गायब। केवल सुनील तटकरे का परिवार दिखा। विपक्ष ने इसे पार्टी कब्जे की कोशिश बताया।
- Written By: अनिल सिंह
Raigad NCP Banner Controversy (फोटो क्रेडिट-X)
Ajit Pawar Sunetra Pawar Photo Missing: महाराष्ट्र की राजनीति में रायगढ़ जिला एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है, लेकिन इस बार वजह कोई विकास कार्य नहीं बल्कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के एक बैनर से उपजी ‘पोस्टर वॉर’ है। रायगढ़ में आयोजित एक आधिकारिक कार्यक्रम के बैनर से उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार और पार्टी के वरिष्ठ नेता अजित पवार की तस्वीरें पूरी तरह गायब मिलीं। इस पोस्टर पर केवल सांसद सुनील तटकरे और उनके परिवार के सदस्यों की तस्वीरें ही दिखाई दे रही हैं, जिसने राज्य की सियासत में ‘पार्टी के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है’ जैसे कयासों को जन्म दे दिया है।
विरोधी गुट (शरद पवार गुट) ने इस घटना को सुनील तटकरे द्वारा पार्टी पर कब्जा करने की कोशिश और ‘कृतघ्नता’ करार दिया है।
तटकरे परिवार का वर्चस्व: अजित और सुनेत्रा दरकिनार?
घटना मानगांव तालुका की है, जहां मंत्री अदिति तटकरे के निर्वाचन क्षेत्र में नवनिर्वाचित जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के लिए एक अभिनंदन समारोह आयोजित किया गया था। मंच पर लगे मुख्य बैनर पर सांसद सुनील तटकरे, मंत्री अदिति तटकरे और पूर्व विधायक अनिकेत तटकरे की तस्वीरें तो प्रमुखता से थीं, लेकिन पार्टी के सर्वेसर्वा अजित पवार और उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार की तस्वीर न होना सबको खटक गया। रायगढ़ को तटकरे परिवार का गढ़ माना जाता है, और पार्टी नेताओं की अनुपस्थिति को स्थानीय स्तर पर ‘शक्ति प्रदर्शन’ के रूप में देखा जा रहा है।
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विपक्ष का हमला: “पार्टी पर कब्जे की शुरुआत”
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के प्रवक्ता विकास लांडे ने इस मुद्दे पर सुनील तटकरे को आड़े हाथों लिया। लांडे ने इसे अजित पवार के साथ विश्वासघात बताते हुए कहा, “जिस अजित दादा ने तटकरे को वर्षों तक प्रदेश अध्यक्ष बनाए रखा और राज्य स्तर पर पहचान दिलाई, आज उन्हीं की तस्वीरें बैनर से गायब हैं। यह तटकरे द्वारा पार्टी पर कब्जा करने की मंशा को साफ दर्शाता है।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि तटकरे पार्टी के भीतर जातिवाद को बढ़ावा दे रहे हैं और उन्हें चुनौती दी कि यदि उनमें हिम्मत है तो वे अपनी अलग पार्टी बनाकर दिखाएं।
सियासी गलियारों में चर्चा: क्या है नया संकेत?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि रायगढ़ के इस बैनर से कई कड़वे सच सामने आ सकते हैं:
स्थानीय स्वायत्तता: क्या रायगढ़ में तटकरे परिवार अब अजित पवार के नेतृत्व से स्वतंत्र होकर अपनी पहचान बनाना चाहता है?
अंदरूनी कलह: क्या अजित पवार और सुनील तटकरे के बीच किसी बात को लेकर मतभेद पैदा हो गए हैं?
भविष्य की रणनीति: क्या यह किसी बड़े राजनीतिक बदलाव (जैसे बीजेपी में विलय या प्रफुल्ल पटेल के साथ नया गठबंधन) की तैयारी का शुरुआती संकेत है?
