'मिसिंग लिंक नहीं अब ये कनेक्टिंग लिंक है', लोकार्पण के बाद CM फडणवीस का बड़ा बयान

Devendra Fadnavis Speech: मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर मिसिंग लिंक प्रोजेक्ट का मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उद्घाटन किया। उन्होंने इसे कनेक्टिंग लिंक बताया, जो सफर को छोटा और सुगम बनाएगा।
Devendra Fadnavis On Missing Link Project
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Devendra Fadnavis On Missing Link Project: यशवंतराव चव्हाण मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर सफर करने वाले यात्रियों को आज बड़ी सौगात मिली है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मिसिंग लिंक का उद्घाटन कर दिया है। यह आज से आम यात्रियों के लिए खुल गया है।

क्या बोले मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस?

यशवंतराव चव्हाण मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे की क्षमता विस्तार परियोजना के हिस्से मिसिंग लिंक परियोजना के उद्घाटन के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि अब इसे मिसिंग लिंक नहीं बल्कि अब कनेक्टिंग लिंक कहा जाना चाहिए। मिसिंग लिंक की संकल्पना 2010 में की गई।

उन्होंने बताया किया इसे 13 कारणों के कारण इस फाइल को बंद कर दिया था। लेकिन जब महायुति सरकार बनी तक मैंने अधिकारियों से इसकी जानकारी ली और पूछा कि हम इसे क्यों नहीं कर सकते। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब इसे मिसिंग लिंक कहना गलत होगा, बल्कि यह पुणे और मुंबई को जोड़ने वाला एक कनेक्टिंग लिंक है।

2010 से रुका था मिसिंग लिंक का काम

प्रोजेक्ट के इतिहास पर चर्चा करते हुए फडणवीस ने बताया कि 'मिसिंग लिंक' की संकल्पना पहली बार साल 2010 में की गई थी। उन्होंने बताया कि साल 2014 तक इसका सर्वे हुआ और इसके बाद इसकी एक रिपोर्ट पेश की गई। लेकिन तत्तकालीन सरकार ने इसके न करने के लिए 13 अलग-अलग कारणों का हवाला देते हुए इसकी फाइल बंद कर दी थी। इसमें से एक कारण यह भी दिया गया था कि यह लाेनावला तालाब के नीचे से जा रहा है इसलिए इसे पूरा नहीं किया जा सकता।

सीएम फडणवीस ने कहा कि जब महायुति की सरकार बनी, तब मैंने स्वयं अधिकारियों से इस प्रोजेक्ट की जानकारी ली। मैंने पूछा कि अगर यह लोगों का समय और ईंधन बचा सकता है, तो हम इसे क्यों नहीं कर सकते? इसके बाद प्रोजेक्ट की बाधाओं को दूर कर इसे युद्ध स्तर पर पूरा किया गया।

ईंधन की बचत और सुगम सफर

इस परियोजना का सबसे बड़ा लाभ वाहन चालकों की जेब पर पड़ेगा। घाट सेक्शन के घुमावदार रास्तों के खत्म होने से न केवल यात्रा का समय 20 से 25 मिनट कम हो जाएगा, बल्कि वाहनों की औसत गति स्थिर रहने के कारण ईंधन की भारी बचत होगी। खड़ी चढ़ाई और ट्रैफिक जाम में जलने वाले पेट्रोल-डीजल से अब राहत मिलेगी, जिससे यह प्रोजेक्ट पर्यावरण के अनुकूल भी साबित होगा।

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