गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ मिसिंग लिंक प्रोजेक्ट, मुंबई-पुणे के बीच रोज बचेगा 1 करोड़ का तेल

Missing Link Project: सीएम फडणवीस ने मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर ऐतिहासिक 'मिसिंग लिंक' प्रोजेक्ट का लोकार्पण किया। दुनिया की सबसे चौड़ी सुरंग और केबल ब्रिज से अब सफर होगा सुपरफास्ट और जाम-मुक्त।
Missing Link Guinness Book of World Records
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस व अन्य को मिसिंग लिंक के लिए गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स का प्रमाण पत्र सौंपते अधिकारी (सोर्स: सोशल मीडिया)
Published on
Updated on

Missing Link Guinness Book of World Records: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर बने मिसिंग लिंक प्रोजेक्ट का उद्घाटन कर दिया है। यह प्रोजेक्ट न केवल मुंबई और पुणे के बीच की दूरी को कम करेगा, बल्कि लोनावला के खतरनाक घाट सेक्शन में लगने वाले भारी ट्रैफिक जाम से भी हमेशा के लिए निजात दिलाएगा। इसके अलावा इससे मुंबई-पुणे के बीच की दूरी भी कम होगी।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने यशवंतराव चव्हाण मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर मिसिंग लिंक प्रोजेक्ट का आज लोकार्पण किया। इस दौरान उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्मंत्री सुनेत्रा पवार, राज्यमंत्री सार्वजनिक बांधकाम मेघना साकोरे-बोर्डीकर व अन्य उपस्थित थे।

गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ मिसिंग लिंक प्रोजेक्ट

इस प्रोजेक्ट में शामिल दो सुरंगों का निर्माण आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों का इस्तेमाल करके किया गया है। सह्याद्री पर्वत श्रृंखलाओं के बीच से इन सुरंगों जिनमें से हर एक की चौड़ाई 23.50 मीटर है की खुदाई करना एक बहुत बड़ी चुनौती थी। इसी वजह से, इन्हें दुनिया की सबसे चौड़ी सुरंगों के तौर पर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे व सुनेत्रा पवार ने गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड का प्रमाण पत्र हासिल किया।

दूसरी सुरंग लोनावला झील के स्तर से लगभग 180 मीटर नीचे स्थित है। इसके अलावा, इस प्रोजेक्ट का मुख्य आकर्षण टाइगर वैली में स्थित 650 मीटर लंबा 'केबल-स्टेड ब्रिज' है, जो इन दोनों सुरंगों को आपस में जोड़ता है। 182 मीटर ऊंचे दो खंभों और 240 केबलों के सहारे खड़ा यह पुल आधुनिक तकनीक का एक बेजोड़ नमूना है।

रोजना 1 करोड़ के ईंधन की होगी बचत

इस नए रास्ते के शुरू होने से, वाहनों के ईंधन की बचत के जरिए रोजाना लगभग 1 करोड़ की आर्थिक बचत होने की उम्मीद है, और साथ ही प्रदूषण के स्तर में भी काफी कमी आएगी। ऊबड़-खाबड़ घाटियों और खराब मौसम की चुनौतियों का सामना करते हुए, निगम ने इस प्रोजेक्ट को सफलतापूर्वक पूरा किया है। आने वाले सालों में, यह प्रोजेक्ट पश्चिमी महाराष्ट्र, कोंकण और मराठवाड़ा के विकास को बढ़ावा देने में एक अहम भूमिका निभाएगा।

6,600 करोड़ रुपये से बना मिसिंग लिंक प्रोजेक्ट

MSRDC द्वारा निर्मित मिसिंग लिंक प्रोजेक्ट पर करीब 6,600 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इसमें एशिया का सबसे ऊंचा केबल-स्टेड ब्रिज भी शामिल है, जो जमीन से लगभग 180 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए, सुरंग के अंदर आधुनिक वेंटिलेशन सिस्टम और फायर फाइटिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया है।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com