

Ujani Dam Fishing Contract: उजनी बांध के प्रस्तावित मासेमारी ठेके को रद्द करने की मांग को लेकर पुणे के सिंचन भवन परिसर में मछुआरों का आंदोलन जारी था। 15 सितंबर से भूख हड़ताल पर बैठे मछुआरों की मांगों पर कार्रवाई नहीं होने से नाराज महिलाओं ने कृष्णा घाटी विकास महामंडल के कार्यकारी संचालक (एमडी) धनंजय धुमाल के केबिन का घेराव किया।
प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने टेबल पर चूड़ियां फोड़कर विरोध जताया। घटनाक्रम के बाद प्रशासन ने मछुआरा प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की और प्रस्तावित ठेके पर रोक का अधिकृत लिखित पत्र सौंपा।
प्रशासन की ओर से मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होने से आंदोलनकारी महिलाएं नाराज थीं। प्रदर्शनकारी सीधे एमडी के केबिन में पहुंचे और उनका घेराव कर विरोध जताया। अचानक हुए इस घटनाक्रम से सिंचन भवन परिसर में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
स्थिति को देखते हुए सुरक्षा के लिए मौके पर पुणे पुलिस बल बढ़ाया गया। एमडी धनंजय धुमाल ने प्रदर्शनकारियों के साथ बातचीत करते हुए संयम बनाए रखा। इसके बाद मछुआरा प्रतिनिधियों ने भी प्रदर्शनकारियों को शांत कराया और स्थिति नियंत्रण में आई।
एमडी धनंजय धुमाल ने मछुआरा प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक कर मामले पर चर्चा की। प्रशासन की ओर से बताया गया कि मंत्री के आदेश के अनुसार उजनी के प्रस्तावित मासेमारी ठेके को स्थगित कर दिया गया है। इसके संबंध में मछुआरों को लिखित पत्र भी सौंपा गया।
प्रशासन ने आश्वासन दिया कि आगे की कार्रवाई स्थानीय मछुआरों को विश्वास में लेकर ही की जाएगी। लिखित आश्वासन मिलने के बाद मछुआरों ने अपनी भूख हड़ताल वापस ले ली।
धुमाल ने कहा कि मंत्री के आदेश से उजनी के प्रस्तावित मासेमारी ठेके को स्थगित किया गया है और स्थानीय मछुआरों को विश्वास में लेकर ही अगला निर्णय लिया जाएगा।
उजनी बांध के मासेमारी व्यवसाय से हजारों स्थानीय परिवारों की आजीविका जुड़ी होने की बात मछुआरा संगठनों की ओर से कही गई है। इनमें पारंपरिक स्थानीय मछुआरे, भूमिपुत्र, पारधी समुदाय, पिछड़ा वर्ग, व्यापारी और मजदूर वर्ग के परिवार शामिल हैं।
आंदोलनकारियों का कहना था कि नई ठेका प्रणाली लागू होने से उनका पारंपरिक रोजगार प्रभावित हो सकता है। प्रस्तावित ठेके के विरोध का मुख्य कारण स्थानीय मछुआरों की आजीविका और उनके पारंपरिक अधिकारों से जुड़ी चिंता रही।
घटनाक्रम के बाद कृष्णा घाटी विकास महामंडल की ओर से सोलापुर के मुख्य अभियंता कार्यालय की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई गई। आरोप है कि सोलापुर कार्यालय ने अपने स्तर पर ईओआई प्रक्रिया शुरू की, लेकिन बाद में मामले की जिम्मेदारी महामंडल पर डाल दी।
इस प्रक्रिया को लेकर स्पष्टता की कमी से मछुआरों में भ्रम की स्थिति बनी और मामला आंदोलन तक पहुंचा। अब प्रशासन की ओर से प्रस्तावित ठेके पर स्थगन का लिखित आश्वासन दिए जाने के बाद फिलहाल आंदोलन समाप्त हो गया है। आगे की कार्रवाई स्थानीय मछुआरों को विश्वास में लेकर किए जाने की बात कही गई है।