

Jambhadi Village Employment: वर्षों से वनक्षेत्र में विभिन्न कामों के जरिए अपने परिवार का भरण-पोषण करने वाले जांभड़ी और आसपास के गांवों के वन मजदूरों के सामने अब रोजगार का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। वन विकास महामंडल के जांभडी-1 व जांभडी-2 क्षेत्र में विभिन्न काम बंद होने से स्थानीय मजदूरों में भारी नाराजगी है। ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि मजदूरों का रोजगार बंद कर उनके परिवारों को भूखा रखने की नौबत क्यों लाई जा रही है? इस संबंध में जांभडी ग्राम पंचायत की ओर से वन विकास महामंडल के प्रबंध निदेशक को ज्ञापन सौंपकर तत्काल निष्कासन कार्य शुरू करने तथा स्थानीय मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
जांभडी परिसर के करीब 15 से 20 गांवों के सैकड़ों मजदूरों की आजीविका वनक्षेत्र के कामों पर निर्भर है। पूर्व में वन विकास महामंडल के माध्यम से निष्कासन, जंगल सफाई, घास कटाई, पौधरोपण, सड़क मरम्मत, बांस कटाई,OWR, IWL व AWC सहित विभिन्न काम नियमित रूप से उपलब्ध होते थे। इससे स्थानीय मजदूरों को गांव के आसपास ही रोजगार मिल जाता था।
ग्रामीणों ने मांग की है कि निष्कासन के काम तत्काल पूर्ववत शुरू किए जाएं और स्थानीय वन मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराया जाए। यदि वन विकास महामंडल ने जल्द निर्णय लेकर रोजगार उपलब्ध नहीं कराया, तो जांभडी परिसर के ग्रामीण व वन मजदूर आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे, ऐसी चेतावनी दी गई है। अब वन विकास महामंडल इस मामले में क्या निर्णय लेता है, इस ओर जांभडी सहित आसपास के 15 से 20 गांवों के सैकड़ों वन मजदूरों की नजरें लगी हुई हैं।
लेकिन नवेगांव-नागझिरा व्याघ्र आरक्षित क्षेत्र में लागू किए गए 'यूनिफाइड कंट्रोल' के निर्णय के बाद स्थानीय मजदूरों के रोजगार पर संकट मंडरा गया है। कई काम बंद होने से मजदूरों के हाथों में काम नहीं है। रोजगार के लिए उन्हें अन्य जिलों और राज्यों में पलायन करना पड़ रहा है। ग्राम पंचायत ने ज्ञापन में कहा कि वन संरक्षण जरूरी है, लेकिन इसके नाम पर वर्षों से वनक्षेत्र पर निर्भर स्थानीय मजदूरों के रोजगार को समाप्त करना उचित नहीं है,
जांभडी गांव के पूर्व सरपंच विजय सोनवाने ने कहा कि गांव के नागरिक पिछले कई वर्षों से वन विभाग के रोजगार पर निर्भर थे। लेकिन अचानक रोजगार बंद होने से ग्रामीणों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने वन विकास महामंडल से तत्काल रोजगार उपलब्ध कराने की मांग की है।
जांभडी सरपंच रजनी कोराम ने कहा कि रोजगार बंद होने से ग्रामीणों के सामने आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है। वन विकास महामंडल ग्रामीणों के लिए रोजगार उपलब्ध कराए।
वन परिक्षेत्र अधिकारी मुलचंद नंदेश्वर ने कहा कि जांभडी वन क्षेत्र में बड़े पैमाने पर काम चल रहा है। किसी भी व्यक्ति को वापस नहीं किया गया है और लोगों को रोजगार मिल रहा है। ग्रामीण कठिन काम करने के इच्छुक नहीं हैं, जिसके कारण वे काम छोड़कर वापस चले जाते हैं। इसमें विभाग की कोई गलती नहीं है।
वन प्रबंधन समिति जांभड़ी के अध्यक्ष श्रीनिवास परकलवार ने कहा कि अचानक रोजगार छिन जाने से ग्रामीणों के सामने रोजगार की समस्या उत्पन्न हो गई है। ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराया जाना चाहिए।