PM स्वनिधि योजना फिर शुरू, पर बैंकों के खराब रिस्पांस से फेरीवाले परेशान
PM स्वनिधि योजना दोबारा शुरू होने के बावजूद पुणे के फेरीवाले बैंकों से रिस्पांस न मिलने से परेशान हैं। दूसरे और तीसरे चरण के कर्ज की मंजूरी बेहद कम हो गई है। जिसके कारण आत्मनिर्भरता पर भी असर हो सकता।
- Written By: अपूर्वा नायक
पीएम स्वानिधि (सौ. सोशल मीडिया )
Pune News In Hindi: स्ट्रीट वेंडर्स (फेरीवालों) को आत्मनिर्भर बनाने के लिए शुरू की गई ‘आत्मनिर्भर योजना’ (पीएम स्वनिधि) पिछले नौ महीने से बंद थी, लेकिन योजना फिर से शुरू होने के बाद भी फेरीवालों को शिकायत है कि उन्हें बैंकों से उचित रिस्पांस नहीं मिल रहा है।
यह योजना फेरीवालों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए बनाई गई है, लेकिन बैंकों के गलत रवैये के कारण इसका मूल उद्देश्य ही विफल हो रहा है। यह बात भी सामने आई है कि गलत रिस्पांस के कारण फेरीवालों को आत्मनिर्भर बनने से दूर धकेला जा रहा है।
फेरीवालों को चक्कर काटने पड़ते है
नौ महीने से बंद पड़ी इस योजना को केंद्र सरकार ने 31 मार्च 2030 तक बढ़ा दिया है। इस योजना के तहत तीन चरणों में पैसे दिए जाते हैं। पहले चरण की राशि वापस चुकाने के बाद ही आवेदक दूसरे चरण का लाभ लेने के लिए पात्र होता है। इसके लिए नया फॉर्म भरने की आवश्यकता नहीं है।
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बैंकों के पास यह अधिकार है कि वे पुराने कर्ज को बंद करके आवेदक को योजना के दूसरे चरण के लिए पात्र बना दें, लेकिन बैंकों से उचित रिस्पांस नहीं मिलने के कारण फेरीवालों को मनपा के चक्कर काटने पड़ते हैं।
पी एम स्वनिधि योजना का लाभअधिक से अधिक फेरीवाले ले और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में एक कदम बढ़ाएं। यह सरकार की महत्वपूर्ण योजना है। आवेदन करने वाले आवेदकों में से 74 प्रतिशत फेरीवालो की कर्ज मिला है और हम और अधिक फेरीवालों को कर्ज दिलाने के लिए प्रयासरत है।
-रामदास चव्हाण, समाज विकास अधिकारी, पुणे महापालिका
बैंकों का अनुचित बर्ताव जिम्मेदार
अब तक 62,489 आवेदन आए थे, जिनमें से 46.445 फेरीवालों को इस योजना का लाभ मिला है। कुल 74.33 प्रतिशत फेरीवालों को इसका फायदा हुआ है। 62 हजार आवेदनों में से पहले चरण में 46.445 फेरीवालों को कर्ज मिला है जबकि दूसरे चरण में 11,571 और तीसरे चरण में 1,686 फेरीवालों को ही इस योजना का लाभमिल पाया है।
पहले चरण के लाभार्थियों की तुलना में दूसरे और तीसरे चरण के लाभार्थियों की संख्या बहुत कम है। यह बात भी सामने आई है कि इसके लिए बैंकों का अनुचित बर्ताव जिम्मेदार है।
यदि बैंकों का सही बर्ताव मिले तो शेष चरणों के लाभार्थियों की संख्या बढ़ाने में मदद मिलेगी और फेरीवालों के आत्मनिर्भर बनने की दिशा में एक और मजबूत कदम उठाया जा सकेगा, योजना में किए गए बदलावों के अनुसार पहले चरण में फेरीवालों को पहले जो 10,000 रुपये मिलते थे, उसे बढ़ाकर अब 15,000 रुपये कर दिया गया है।
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अग्रणी बैंक का निर्देश
अग्रणी बैंक द्वारा दिए गए निर्देश के अनुसार पहले वरण का कर्ज बंद होने के बाद दूसरे और तीसरे कर्ज के लिए दूसरा फॉर्म भरने की आवश्यकता नहीं है। पहला कर्ज चुकाने के बाद उसे बंद करने की प्रक्रिया बैंकों को ही करनी है। इसके बाद फेरीवाले दूसरे कर्ज के लिए स्वतः ही पात्र हो जाएंगे, इसके लिए उन्हें मनपा जाने की आवश्यकता नहीं है।
