Pimpri के हर सिग्नल पर ‘भीख माफिया’ का कब्जा! बच्चे और महिलाएं बनीं रैकेट का हिस्सा?
Pimpri News In Hindi: पिंपरी चिंचवड़ में इन दिनों भिखारियों का आतंक देखने के लिए मिल रहा है। किसी भी सिग्नल पर गाड़ी रुकने पर बुजुर्ग, महिलाएं, दिव्यांग और छोटे बच्चे द्वारा पैसों की मांग की जाती है।
- Written By: अपूर्वा नायक
पुणे में भिखारी (सौ. सोशल मीडिया )
Pimpri Chinchwad News In Hindi: पिंपरी-चिंचवड़ शहर के लगभग हर प्रमुख चौराहे पर आज भिखारियों की बड़ी फौज दिखाई देती है। बुजुर्ग, महिलाएं, दिव्यांग और छोटे बच्चे सिग्नल पर रुकने वाले वाहनों के पास जाकर पैसे मांगते हैं।
कई बार ये लोग जबरन गाड़ियों से लटक जाते हैं या शीशे पर दस्तक देते हैं। अगर भीख न दी जाए तो कुछ बच्चे गाड़ियों पर खरोंच तक डाल देते हैं। ऐसे दृश्य अब शहर के लिए आम हो गए हैं। वाहन चालकों को इन स्थितियों से न केवल असुविधा होती है बल्कि दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है।
मनपा के पास ठोस नीति नहीं
भिखारी अपने शरीर की चोटें, जलने के निशान या टूटे अंग दिखाकर दया की भीख मांगते हैं। शहर में बढ़ती इस समस्या के बावजूद पिंपरी-चिंचवड़ महानगर पालिका के पास कोई ठोस नीति नहीं है। मेट्रो, फ्लाईओवर और चौड़ी सड़कों के साथ औद्योगिक विकास ने शहर का चेहरा बदल दिया है, लेकिन हर चौराहे पर बैठे भिखारी प्रशासन की लापरवाही का जीवंत उदाहरण चन चुके हैं।
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सिग्नल पर हर दिन का दृश्य
- सिग्नल पर रुकते ही महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग गाड़ियों की खिड़कियों पर दस्तक देकर पैसे मांगते हैं, कई बार जबरदस्ती पैसे लेने की कोशिश की जाती है।
- गोद में बच्चा लेकर अचानक वाहन के आगे कूद जाने वाली महिलाएं और सिग्नल खुलते ही सड़क पार करने वाले बच्चे रोजमर्रा का नजारा है।
- पुलिस रिकॉर्ड में ऐसे कई मामले दर्ज है। लेकिन अब तक प्रशासन ने इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है।
इन चौकों पर सबसे ज्यादा भिखारी
डॉ बाबासाहेब आंबेडकर चौक, मोरवाडी चौक, पवले चौक, भक्ति शक्ति चौक, यशवंत नगर चौक, भोसरी चौक, हिंजवड़ी और वाकड के सिग्नलों पर सबसे ज्यादा भिखारी देखे जा सकते हैं।
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भिखारियों के गिरोह सक्रिय होने की आशंका
नागरिकों के बीच यह चर्चा आम है कि शहर में भीख मांगने का एक संगठित “रैकेट” सक्रिय है। महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों का इस्तेमाल इस व्यवसाय में किया जाता है। सवाल उठता है कि इतनी बड़ी संख्या में भिखारी रोज कहां से आते हैं? क्या कोई गिरोह इन्हें संचालित करता है? लेकिन महानगर पालिका और पुलिस विभाग इस पर चुप्पी साधे हुए हैं।
