पुणे में दर्दनाक हादसा! जनगणना ड्यूटी पर जा रही महिला शिक्षिका को डंपर ने कुचला, शिक्षकों में भारी आक्रोश
Pune Road Accident: पुणे के मावल में सरकारी काम पर जा रही शिक्षिका दीपाली तांबे की सड़क हादसे में दर्दनाक मौत। इस घटना के बाद शिक्षक संगठनों ने गैर-शैक्षणिक कार्यों का विरोध शुरू कर दिया है।
- Written By: आकाश मसने
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: AI)
Teacher Died In Pune Road Accident: महाराष्ट्र के पुणे जिले से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। पुणे जिले के मावल तहसील स्थित कान्हे फाटा के पास जनगणना संबंधी शासकीय कार्य पर जा रही एक महिला शिक्षिका की सड़क हादसे में मौत हो गई। इस घटना से शिक्षक संगठनों में भारी आक्रोश फैल गया है। मृत शिक्षिका की पहचान दीपाली तांबे के रूप में हुई है।
कैसे हुआ हादसा?
मिली जानकारी के अनुसार शिक्षिका दीपाली तांबे अपनी स्कूटी से पुणे-मुंबई पुराने हाईवे पर स्थित कान्हे फाटा की ओर जा रही थीं, तभी एक तेज रफ्तार डंपर ने उनकी गाड़ी को जोरदार टक्कर मार दी। इस हादसे में उनकी मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस ने मामला दर्ज कर हादसे की जांच शुरू कर दी है।
बता दें कि महाराष्ट्र समेत पूरे देश में जनगणना से जुड़े कार्य चल रहे हैं, जिनमें शिक्षकों की बड़ी संख्या को तैनात किया गया है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि इन गैर-शैक्षणिक कार्यों का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे शिक्षण व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
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मालव हादसे के बाद शिक्षकों में आक्रोश
पुणे में सड़क हादसे में महिला शिक्षिका की मौत के बाद मावल तहसील में शिक्षकों में आक्रोश और भारी नाराजगी देखी जा रही है। शिक्षकों ने सवाल उठाया है कि छुट्टी के दिनों में भी शिक्षकों को ऐसे कार्यों के लिए क्यों बुलाया जा रहा है और इस दुर्घटना के लिए जिम्मेदार कौन है।
जनगणना कार्य में लगे कर्मी की मौत का चौथा मामला
बताया जा रहा है कि यह पहला हादसा नहीं है। जनगणना कार्य के दौरान यह चौथा मौत का मामला है। इससे पहले महाराष्ट्र में तीन घटनाएं सामने आ चुकी हैं। कोल्हापुर के भगवान पाटिल और सांगोला के राजाराम ढोले की हार्ट अटैक से मौत हो गई थी। वहीं लातूर के सुंदरम वांगसकर की सड़क दुर्घटना में मृत्यु हुई है। इन घटनाओं के बाद पीड़ित परिवारों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
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जनगणना का दूसरा चरण शुरू
बता दें कि राष्ट्रीय जनगणना2027 का महाराष्ट्र में दूसरा चरण 16 मई 2026 से आधिकारिक रूप से शुरू हो चुका है, जो 14 जून 2026 तक जारी रहेगा। इस अभियान के संगठनात्मक ढांचे की बात करें तो, कुशल प्रबंधन के लिए राज्य के हर शहर को हाउस-लिस्टिंग ब्लॉकों में विभाजित किया गया है। इस कार्य को जमीनी स्तर पर पूरा करने के लिए पूर्ण महाराष्ट्र में लगभग 264,000 एन्यूमरेटर्स और सुपरवाइजरों की एक विशाल टीम को तैनात किया है। इन प्रगणकों को प्रगति और विकास जैसे प्रेरक नामों से संबोधित किया गया है, जिन्हें घर-घर जाकर डेटा एकत्र करने की जिम्मेदारी दी गई है। गणना की सटीकता सुनिश्चित करने के लिए, प्रत्येक प्रगणक को औसतन 800 व्यक्तियों की जानकारी एकत्र करने का कार्य सौंपा गया है।
