Moshi Garbage Depot: मोशी हादसे के घायलों से मिलीं सुप्रिया सुले, निष्पक्ष जांच और मुआवजे की मांग
Moshi Garbage Depot Tragedy: मोशी कचरा डेपो हादसे के बाद राजनीति गरमा गई है। सांसद सुप्रिया सुले ने साईनाथ अस्पताल जाकर घायल मजदूरों से मुलाकात की। इस घटना के निष्पक्ष जांच की मांग की।
- Written By: गोरक्ष पोफली
सुप्रिया सुले ने की घायल मजदूरों से मुलाकात (सोर्स: सोशल मीडिया)
Supriya Sule Visits Moshi Garbage Depot Accident Injured: महाराष्ट्र के पिंपरी-चिंचवड स्थित मोशी कचरा डेपो में हुई हृदयविदारक घटना ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। कचरे के विशाल ढेर के नीचे दबने से हुई 9 मजदूरों की मौत के बाद अब सियासत और जवाबदेही को लेकर सवाल तेज हो गए हैं।
इसी कड़ी में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी शरद चंद्र पवार गुट की सांसद सुप्रिया सुले ने अस्पताल जाकर घायलों का हालचाल जाना और इस पूरी घटना के लिए सरकारी तंत्र की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया।
मजदूरों ने सुनाई मौत के मंजर की कहानी
सांसद सुप्रिया सुले बीती रात साईनाथ अस्पताल पहुंचीं, जहां इस हादसे में बाल-बाल बचे मजदूरों का इलाज चल रहा है। अस्पताल के बिस्तर पर लेटे घायलों से बात करते समय माहौल अत्यंत भावुक हो गया। मजदूरों ने उस खौफनाक मंजर को याद करते हुए बताया कि कैसे पलक झपकते ही कचरे का पहाड़ उन पर गिर गया और उन्हें संभलने का मौका तक नहीं मिला।
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सुप्रिया सुले ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी व्यथा व्यक्त करते हुए कहा, “मोशी कचरा डेपो में हुई दुर्घटना और कचरे के ढेर के नीचे दबकर मजदूरों की मौत की खबर अत्यंत विचलित करने वाली है। कल रात मैंने साईनाथ अस्पताल जाकर घायल कर्मचारियों से मुलाकात की और उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। उस थर्रा देने वाली घटना का अनुभव खुद घायल मजदूरों ने साझा किया।”
प्रशासनिक लापरवाही पर बरसीं सुले: यह हत्या है, हादसा नहीं
सुले ने इस घटना को महज एक दुर्घटना मानने से इनकार कर दिया। उन्होंने इसे ‘शासकीय और प्रशासकीय लापरवाही’ का परिणाम बताया। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि प्रशासन की सुस्ती और सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारण 9 निर्दोष लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी।
अस्पताल के अधिकारियों को निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि घायलों के इलाज में कोई कोताही न बरती जाए और उन्हें तत्काल सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधा प्रदान की जाए। सुप्रिया सुले ने स्पष्ट रूप से मांग की है कि
- इस पूरे प्रकरण की गहन और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
- दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों पर कठोर कार्रवाई की जाए।
- मृतक मजदूरों के परिवारों और घायलों को सरकार की ओर से उचित मुआवजा तुरंत दिया जाए।
- ठोस कचरा प्रबंधन के लिए नीतिगत बदलाव की जरूरत
सिर्फ मुआवजे और जांच तक ही सीमित न रहते हुए, सुप्रिया सुले ने बड़े शहरों के कचरा प्रबंधन के बुनियादी ढांचे पर भी सवाल उठाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि बड़े शहरों में कचरे के निस्तारण और उसके रीसाइकलिंग के लिए एक वैज्ञानिक और समयबद्ध नीति की आवश्यकता है।
बड़े शहरों के कचरा प्रबंधन के लिए नीति बनाने की जरूरत
उन्होंने सरकार को नसीहत देते हुए कहा, हमने समय-समय पर बड़े शहरों के ठोस कचरा प्रबंधन के लिए एक निश्चित नीति बनाने की जरूरत को रेखांकित किया है। प्रत्येक शहर के लिए कचरा प्रबंधन हेतु सरकारी स्तर पर कठोर समय सीमा और वैज्ञानिक पद्धति निर्धारित करना अत्यंत आवश्यक है। सरकार को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए ताकि भविष्य में फिर किसी का घर इस तरह न उजड़े।
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कचरा प्रबंधन की व्यवस्था को सुरक्षित बनाए
मोशी कचरा डेपो की इस घटना ने शहरी विकास और स्वच्छता अभियानों के पीछे छिपी कड़वी सच्चाई को उजागर कर दिया है। सुप्रिया सुले का यह दौरा और उनकी मांगें अब राज्य सरकार पर दबाव बना रही हैं कि वह न केवल इस हादसे के दोषियों को सजा दे, बल्कि कचरा प्रबंधन की व्यवस्था को इतना सुरक्षित बनाए कि फिर कभी किसी मजदूर को कचरे के नीचे अपनी जिंदगी न गंवानी पड़े।
