Sunetra Pawar Guardian Minister (फोटो क्रेडिट-X)
Pune Beed New Guardian Minister: महाराष्ट्र सरकार ने उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार की राजनीतिक और प्रशासनिक भूमिका को और मजबूत करते हुए उन्हें दो महत्वपूर्ण जिलों, पुणे और बीड का पालक मंत्री नियुक्त किया है। मंगलवार (3 फरवरी) को राज्य सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा इस संबंध में आधिकारिक शासनादेश (GR) जारी किया गया। गौरतलब है कि इन दोनों जिलों की जिम्मेदारी पहले उनके पति और दिवंगत उपमुख्यमंत्री अजित पवार संभाल रहे थे। अजित पवार के आकस्मिक निधन के बाद इन पदों पर नियुक्ति को लेकर राजनीतिक हलकों में काफी चर्चा थी, जिस पर अब सरकार ने मुहर लगा दी है।
सुनेत्रा पवार ने 31 जनवरी को उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, जिसके बाद उन्हें राज्य आबकारी (Excise), खेल एवं युवा कल्याण, और अल्पसंख्यक विकास जैसे महत्वपूर्ण विभाग सौंपे गए थे। अब पालक मंत्री के रूप में उन्हें जिलों के स्तर पर विकास योजनाओं के क्रियान्वयन, जिला योजना समिति (DPDC) के फंड का प्रबंधन और स्थानीय प्रशासनिक मुद्दों को सुलझाने की सीधी जिम्मेदारी मिल गई है। पुणे और बीड दोनों ही जिले अजित पवार के लिए राजनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण थे।
पुणे जिला पवार परिवार का गृह जनपद और राजनीतिक गढ़ है, वहीं बीड जिले में भी अजित पवार ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी मजबूत पकड़ बनाई थी। इन दोनों जिलों के पालक मंत्री के रूप में सुनेत्रा पवार पर अब अजित दादा द्वारा शुरू किए गए अधूरे प्रोजेक्ट्स को पूरा करने और कार्यकर्ताओं के नेटवर्क को एकजुट रखने की बड़ी जिम्मेदारी होगी। विशेष रूप से बीड जिले में हाल के दिनों में उभरे सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों के बीच सुनेत्रा पवार का प्रशासनिक कौशल और नेतृत्व की परीक्षा होगी।
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अजित पवार के पास उपमुख्यमंत्री पद के साथ-साथ वित्त और नियोजन (Finance and Planning) मंत्रालय भी था। हालांकि, सुनेत्रा पवार को ये विभाग नहीं दिए गए और वर्तमान में वित्त विभाग मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के पास है। लेकिन दो जिलों की पालक मंत्री नियुक्त किए जाने से यह स्पष्ट हो गया है कि सरकार और पार्टी उन्हें क्षेत्रीय स्तर पर एक प्रभावशाली नेता के रूप में स्थापित करना चाहती है। जानकारों का मानना है कि बजट सत्र के बाद उन्हें कुछ और महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी मिल सकती हैं।
पालक मंत्री के रूप में सुनेत्रा पवार अब जिला प्रशासन के साथ मिलकर कानून-व्यवस्था, कृषि संकट और बुनियादी ढांचे से जुड़ी समस्याओं पर सीधी निगरानी रख सकेंगी। आगामी स्थानीय निकाय चुनावों और जिला परिषद चुनावों के मद्देनजर उनकी यह नियुक्ति रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पार्टी के कार्यकर्ताओं में भी इस फैसले से उत्साह देखा जा रहा है, क्योंकि उन्हें उम्मीद है कि सुनेत्रा पवार उसी सक्रियता के साथ काम करेंगी जिसके लिए अजित दादा जाने जाते थे।