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सतेज पाटील ने किसानों पर कथित कर्जवसूली दबाव को लेकर गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज करने की मांग की।
पाटील ने राज्य सरकार से संबंधित कंपनियों के खिलाफ नियामक संस्थाओं में शिकायत दर्ज कराने को कहा।
कांग्रेस नेता ने ऋण पुनर्गठन के बजाय संपूर्ण फसल ऋण माफी की मांग उठाई।
Pune Farmers Debt Recovery: किसानों पर कर्जवसूली के लिए दबाव बनाने वाली माइक्रो फाइनेंस कंपनियों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया जाना चाहिए। इन कंपनियों के कामकाज पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है क्या? यह सवाल कांग्रेस नेता सतेज पाटील ने उठाया।
उन्होंने राज्य सरकार से संबंधित कंपनियों के खिलाफ भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) तथा भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) में शिकायत दर्ज कराने की मांग की। गोकुल दूध संघ के चुनाव में मिली सफलता के लिए पुणे शहर कांग्रेस भवन में सतेज पाटील का सत्कार किया गया। इस अवसर पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने किसानों की आत्महत्या, कर्जवसूली और राज्य सरकार की भूमिका पर अपनी बात रखी।
पाटील ने कहा कि किसानों को संकट से उबारने के लिए सरकार को समय रहते कदम उठाने चाहिए थे। जब सरकार को अल नीनो के संभावित प्रभाव की जानकारी थी, तो खरीफ सीजन के दौरान किसानों को पहले से सतर्क क्यों नहीं किया गया? सरकार ने राहत पैकेज में फसल ऋण के पुनर्गठन की घोषणा की है, लेकिन इससे किसानों को अपेक्षित राहत नहीं मिलेगी। कांग्रेस की मांग है कि किसानों का पूरा फसल ऋण माफ किया जाए।
उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों को पांच हजार रुपये की सहायता देकर सरकार ने उनके साथ मजाक किया है। किसानों पर बढ़ते आर्थिक दबाव और कर्जवसूली के तरीकों को गंभीरता से लेते हुए सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए।
नांदेड़ में किसान से जुड़ी घटना का उल्लेख करते हुए पाटील ने कहा कि इस मामले में गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज किया जाना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि माइक्रो फाइनेंस कंपनियां किसानों से किस तरह कर्जवसूली कर रही हैं और सरकार इन पर नियंत्रण क्यों नहीं रख पा रही है। उन्होंने राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर भी सवाल उठाए।
पाटील ने कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे और सहकारिता मंत्री की भूमिका पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि किसानों के संकट के समय दोनों मंत्री सक्रिय रूप से सामने आते नहीं दिख रहे हैं। सरकार को केवल घोषणाएं करने के बजाय किसानों को राहत देने और कर्जवसूली के नाम पर कथित दबाव बनाने वाली कंपनियों पर कार्रवाई करने की जरूरत है।
(पुणे से समीर सय्यद की रिपोर्ट)