

छत्रपति संभाजीनगर जिले में चारा उत्पादन के लिए 1,262 एकड़ जमीन उपलब्ध कराई जाएगी।
गंगापुर तहसील के जामगांव, आंतापुर और वरखेड में जमीन चिह्नित।
जमीन का किराया 7,000 रुपये प्रति एकड़, अग्रिम भुगतान अनिवार्य।
चारा फसलों की खेती 3 से 4 महीने की अवधि के लिए होगी।
इच्छुक किसानों और संस्थाओं से 30 अक्टूबर तक आवेदन आमंत्रित।
उत्पादित चारा प्राथमिकता से सरकार को देना होगा; जिले के बाहर बिक्री पर रोक।
Chhatrapati Sambhajinagar Drought Fodder Production 1262 Acres: छत्रपति संभाजीनगर जिले में सूखे की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने चारा उत्पादन के लिए 1,262 एकड़ सरकारी जमीन उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। जमीन 7,000 रुपये प्रति एकड़ किराये पर 3 से 4 महीने के लिए दी जाएगी। इच्छुक किसानों और पात्र संस्थाओं को 30 अक्टूबर तक आवेदन करना होगा।
छत्रपति संभाजीनगर जिले में सूखे की स्थिति को देखते हुए पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने विशेष पहल की है। इसके तहत गंगापुर तहसील में राज्य कृषि महामंडल की कुल 1,262 एकड़ जमीन पर चारा फसलों की खेती की जाएगी। यह जमीन इच्छुक किसानों, किसान उत्पादक कंपनियों और पात्र संस्थाओं को 3 से 4 महीने की अवधि के लिए उपलब्ध कराई जाएगी।
प्रशासन के अनुसार, जमीन का किराया 7,000 रुपये प्रति एकड़ निर्धारित किया गया है। इच्छुक संस्थाओं से 30 अक्टूबर तक आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। इस कार्यक्रम को जिलाधिकारी कार्यालय, कृषि विभाग, पशुपालन विभाग और राज्य कृषि महामंडल के माध्यम से संचालित किया जाएगा।
चारा उत्पादन कार्यक्रम के तहत गंगापुर तहसील के तीन स्थानों पर जमीन उपलब्ध कराई जाएगी।
जामगांव: 900 एकड़
आंतापुर: 300 एकड़
वरखेड: 62 एकड़
इस प्रकार कुल 1,262 एकड़ जमीन पर चारा फसलों की खेती की जाएगी। इसका उद्देश्य सूखे की स्थिति में पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता बढ़ाना है।
इस योजना के तहत चारा उत्पादन और प्रसंस्करण का अनुभव रखने वाले किसान, किसान उत्पादक कंपनियां (FPO), किसान सहकारी संस्थाएं और पात्र लाभार्थी आवेदन कर सकते हैं। राष्ट्रीय पशुधन मिशन के अंतर्गत साइलेज उत्पादन परियोजना चलाने वाले लाभार्थियों को भी आवेदन का अवसर दिया गया है।
इच्छुक संस्थाओं को न्यूनतम 100 एकड़ क्षेत्र में चारा फसलों की खेती करने की तैयारी दर्शानी होगी। जमीन का किराया 7,000 रुपये प्रति एकड़ होगा और इसका अग्रिम भुगतान करना अनिवार्य रहेगा।
पात्र संस्थाओं का चयन और उन्हें पट्टे पर दिए जाने वाले क्षेत्र का निर्धारण जिलाधिकारी विनय गौड़ा जीसी की अध्यक्षता वाली समिति करेगी। चयनित संस्थाओं को 500 रुपये के स्टांप पेपर पर करारनामा करना होगा। इसके अलावा 50,000 रुपये की सुरक्षा जमा राशि डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से जमा करनी होगी।
इच्छुक संस्थाओं को निर्धारित प्रारूप में इच्छापत्र के साथ आवश्यक दस्तावेज जमा करने होंगे। इनमें संस्था के लेटरहेड पर आवेदन, मांगे गए क्षेत्र का विवरण, मुख्य प्रवर्तक के हस्ताक्षरित आधार कार्ड और पैन कार्ड की प्रतियां, चारा उत्पादन के अनुभव का प्रमाणपत्र तथा संस्था का पंजीकरण प्रमाणपत्र शामिल हैं।
राष्ट्रीय पशुधन मिशन के अंतर्गत कार्यरत संस्थाओं को संबंधित मान्यता प्रमाणपत्र भी देना होगा। इसके साथ ही सभी नियमों और शर्तों को स्वीकार करने संबंधी प्रमाणपत्र मुख्य प्रवर्तक के हस्ताक्षर और मुहर के साथ संलग्न करना अनिवार्य है।
आवेदन और दस्तावेज कार्यालयीन समय में जिला उप आयुक्त, पशुपालन एवं दुग्ध व्यवसाय कार्यालय में जमा किए जा सकते हैं। आवेदन की अंतिम तारीख 30 अक्टूबर निर्धारित की गई है।
प्रशासन ने जमीन के उपयोग और उत्पादित चारे की बिक्री को लेकर स्पष्ट शर्तें रखी हैं। आवंटित जमीन का इस्तेमाल केवल चारा उत्पादन के लिए किया जा सकेगा। उत्पादित चारा जरूरत के अनुसार सबसे पहले सरकार को उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा।
यदि सरकार को चारे की आवश्यकता नहीं होती है, तो जिलाधिकारी की अनुमति से जिले के किसानों को इसकी बिक्री की जा सकेगी। हालांकि, जिले के बाहर चारा बेचने की अनुमति नहीं होगी।
जिलाधिकारी विनय गौड़ा जीसी ने पात्र और इच्छुक किसानों एवं संस्थाओं से निर्धारित समयसीमा के भीतर आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन जमा करने का आह्वान किया है।