रोहित तिलक (सोर्स: सोशल मीडिया)
Rohit Tilak On Congress: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। ‘स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है’ का नारा देने वाले लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के वंशज रोहित तिलक ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है। चर्चाएं जोरों पर हैं कि वे जल्द ही मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो सकते हैं।
इस्तीफे के बाद रोहित तिलक ने पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने खुलासा किया कि तीन साल पहले जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया था, तभी से कांग्रेस नेतृत्व उनसे नाराज चल रहा था। रोहित ने स्पष्ट किया, “यह पुरस्कार तिलक स्मारक ट्रस्ट द्वारा उन लोगों को दिया जाता है जिन्होंने देश को आगे बढ़ाने में योगदान दिया है। इससे पहले यह सम्मान इंदिरा गांधी, मनमोहन सिंह, प्रणब मुखर्जी और अटल बिहारी वाजपेयी जैसे दिग्गजों को भी दिया जा चुका है।” उन्होंने अफसोस जताया कि पार्टी इसे राजनीतिक चश्मे से देख रही है।
Mumbai, Maharashtra: Rohit Tilak, descendant of Freedom Fighter Bal Gangadhar Tilak says, “This award was initiated by my grandfather in 1983 and is given through the Tilak Smarak Press. It is awarded to those whose contributions have advanced the nation and earned recognition… pic.twitter.com/OC86whdbHZ — IANS (@ians_india) March 12, 2026
रोहित तिलक ने वैचारिक मतभेदों का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस का वीर सावरकर के प्रति बदला हुआ रवैया उनकी समझ से परे है। उन्होंने कहा, “यह साफ नहीं है कि कांग्रेस अब सावरकर के बारे में इतनी बुराई क्यों कर रही है। पहले ऐसा नहीं था, क्योंकि वे एक महान मूल्य प्रणाली का प्रतिनिधित्व करते थे।”
Mumbai, Maharashtra: Rohit Tilak, descendant of Freedom Fighter Bal Gangadhar Tilak says, “It is unclear why the Congress is now making critical remarks about Savarkar. Earlier, this was not the case because he represented a value system…” pic.twitter.com/O40KnMCkV2 — IANS (@ians_india) March 12, 2026
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रोहित ने कांग्रेस को इतिहास का आईना दिखाते हुए कहा कि लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक किसी एक राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं थे। उन्होंने याद दिलाया कि उस समय कांग्रेस एक पार्टी नहीं बल्कि एक ‘आजादी का आंदोलन’ थी जिसमें हर विचारधारा के लोग शामिल थे। बाद में, यह अलग-अलग पार्टियों में बंट गया। उन्होंने जोर देकर कहा कि क्रांतिकारियों का बलिदान देश के लिए था, न कि किसी विशेष दल के लिए।
Mumbai, Maharashtra: Rohit Tilak, descendant of Freedom Fighter Bal Gangadhar Tilak says, “… Tilak ji did not belong to any political party; at that time, the Congress was a movement, not a party, it was a freedom movement that included everyone. Later, it split into different… pic.twitter.com/ADUC5SKRJn — IANS (@ians_india) March 12, 2026
रोहित तिलक का जाना पुणे और महाराष्ट्र में कांग्रेस के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, विशेषकर ब्राह्मण समुदाय और तिलक समर्थकों के बीच पार्टी की पकड़ कमजोर हो सकती है।