रोहित पवार vs सुनील तटकरे: बयानबाजी से तेज हुई सियासी जंग, ‘भावनात्मक अधिकार’ पर दिया जवाब
Maharashtra Politics: बारामती में एनसीपी के दो गुटों के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। सुनील तटकरे के बयान पर रोहित पवार ने पलटवार करते हुए कहा कि वे भावनात्मक रूप से जुड़े हैं।
- Written By: अपूर्वा नायक
सुनील तटकरे Vs रोहित पवार (सौ. सोशल मीडिया )
Rohit Pawar Vs Sunil Tatkare: बारामती में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद चंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार और अजीत पवार गुट के प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है।
हाल ही में तटकरे ने रोहित पवार की नैतिकता पर सवाल उठाते हुए कहा था कि उन्हें अजीत पवार की पार्टी के आंतरिक मामलों पर बोलने का कोई अधिकार नहीं है। इस बयान के बाद दोनों गुटों के बीच राजनीतिक माहौल गरमा गया है।
रोहित पवार का पलटवार
तटकरे के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए रोहित पवार ने स्पष्ट कहा कि उन्हें किसी की सलाह की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा, “हमें क्या बोलना चाहिए और क्या नहीं, यह कोई और तय नहीं कर सकता।” रोहित पवार ने यह भी माना कि राजनीतिक दृष्टि से भले ही उनके पास दूसरे गुट के मामलों पर टिप्पणी करने का नैतिक अधिकार सीमित हो, लेकिन उनके पास भावनात्मक अधिकार जरूर है।
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व्यक्तिगत संबंधों का दिया हवाला
रोहित पवार ने बताया कि पिछले कुछ महीनों में अजीत पवार ने उनसे कई व्यक्तिगत बातें साझा की थीं, जो वे केवल अपने करीबी लोगों से ही करते हैं। उन्होंने कहा कि परिवार और रिश्तों के कारण वे भावनात्मक रूप से जुड़े हुए हैं, इसलिए कुछ मुद्दों पर बोलना उनका अधिकार है।
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भावनात्मक अधिकार पर जोर
रोहित पवार ने दो टूक कहा कि वे वही बोलेंगे जो उन्हें भावनात्मक रूप से सही लगेगा और इसमें किसी की दखलंदाजी स्वीकार नहीं करेंगे। इस बयान के बाद एनसीपी के दोनों गुटों के बीच राजनीतिक खींचतान और तेज होने की संभावना जताई जा रही है। फिलहाल इस विवाद ने महाराष्ट्र की सियासत में नई बहस को जन्म दे दिया है, जिस पर राजनीतिक हलकों की नजर बनी हुई है।
