

Pune Ration Shopkeepers Strike News: राशन वितरण व्यवस्था में तकनीकी खामियों को लेकर पुणे जिले के राशन दुकानदारों का गुस्सा अब सड़क पर उतर आया है। ई-पॉस (e-PoS) मशीनों के बार-बार हैंग होने, सर्वर की धीमी गति और नेटवर्क कनेक्टिविटी की समस्या के विरोध में सोमवार को जिले के राशन दुकानदारों ने एक दिवसीय सांकेतिक बंद रखा।
इस बंद का असर पुणे शहर के साथ ग्रामीण इलाकों और भोर तहसील में भी देखने को मिला। पुणे जिला राशन विक्रेता संघ के अध्यक्ष सोमनाथ वचकल के मुताबिक, जिले के करीब 2,500 लाइसेंसधारी राशन और केरोसिन दुकानदार इस बंद में शामिल हुए।
राशन वितरण के लिए इस्तेमाल होने वाली ई-पॉस मशीनों में लाभार्थियों का बायोमेट्रिक सत्यापन किया जाता है। दुकानदारों का आरोप है कि पिछले कुछ समय से Thumb Scan के बाद सर्वर से कनेक्शन स्थापित होने में काफी समय लग रहा है।
कई बार मशीन हैंग हो जाती है या सर्वर से कनेक्शन नहीं हो पाता। इसके चलते एक लाभार्थी को राशन देने की प्रक्रिया में ही काफी समय लग जाता है।
दुकानदारों के अनुसार, सितंबर महीने में यह समस्या और गंभीर हो गई है। सुबह राशन लेने पहुंचने वाले लाभार्थियों को सर्वर की समस्या के कारण लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है।
दुकानदारों का कहना है कि तकनीकी समस्या उनके नियंत्रण से बाहर होने के बावजूद इसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ता है। सर्वर डाउन रहने के दौरान राशन वितरण में देरी होती है और कई बार लाभार्थियों और दुकानदारों के बीच बहस और विवाद की स्थिति भी बन जाती है।
राशन विक्रेताओं का कहना है कि केवल अस्थायी तौर पर सर्वर ठीक करने के बजाय पूरे सिस्टम के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की जरूरत है। ई-पॉस मशीनों को निर्बाध नेटवर्क कनेक्टिविटी और तेज सर्वर उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
उनका कहना है कि तकनीकी समस्या का सीधा असर सार्वजनिक वितरण प्रणाली पर पड़ रहा है और गरीब तथा जरूरतमंद लाभार्थियों को समय पर अनाज नहीं मिल पा रहा है।
राशन दुकानदार संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि ई-पॉस मशीनों की सर्वर और नेटवर्क संबंधी समस्या का स्थायी समाधान जल्द नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। संगठन के मुताबिक, जरूरत पड़ने पर पूरे महाराष्ट्र में अनिश्चितकालीन और तीव्र आंदोलन किया जा सकता है।
ई-पॉस व्यवस्था का उद्देश्य राशन वितरण को पारदर्शी और डिजिटल बनाना है, लेकिन अगर सर्वर और नेटवर्क की तकनीकी समस्याएं लगातार बनी रहती हैं तो इसका असर सीधे लाभार्थियों तक पहुंचने वाली खाद्य आपूर्ति पर पड़ता है।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस तकनीकी समस्या को कितनी जल्दी दूर करता है और पुणे के करीब 2,500 राशन दुकानदारों की मांगों पर क्या कार्रवाई होती है।