Pune ZP का बड़ा फैसला: ग्रामीण स्कूलों में अब 10वीं तक पढ़ाई, छात्रों को मिलेगा बड़ा लाभ

Pune ZP Schools: पुणे जिला परिषद ने ग्रामीण छात्रों के लिए बड़ा कदम उठाते हुए स्कूलों में 10वीं तक शिक्षा शुरू करने का फैसला किया है, जिससे ड्रॉपआउट घटेगा और बेटियों की पढ़ाई को बढ़ावा मिलेगा।
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पुणे वॉटर क्राइसिस टैंकर सप्लाई (सौ. फाइल फोटो )
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Pune ZP Schools Upgrade Plan: ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य और सरकारी शिक्षण व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में पुणे जिला परिषद (ZP) ने एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी कदम उठाया है।

अब जिला परिषद के चुनिंदा स्कूलों में कक्षा 10वीं तक की शिक्षा उपलब्ध कराई जाएगी। इस निर्णय से न केवल ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की गंगा अधिक प्रवाही होगी, बल्कि उन हजारों छात्रों का सपना भी पूरा होगा जिन्हें संसाधनों के अभाव में पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ती थी।

सरकारी स्कूलों पर बढ़ा विश्वास

वर्तमान में पुणे जिले की चार प्रमुख जिला परिषद शालाओं में 9वीं और 10वीं के वर्ग सफलतापूर्वक संचालित किए जा रहे हैं। इनमें दौंड तहसील की गलांडवाडी, मुलशी की भोईरवाडी, खेड की निघोजे और धानोरे शालाएं शामिल हैं।

इन स्कूलों की सफलता को देखते हुए प्रशासन ने अब जिले की अन्य प्राथमिक और उच्च प्राथमिक शालाओं (कक्षा 5वीं और 8वीं) को प्राकृतिक वृद्धि (Natural Growth) के सिद्धांत पर 10वीं तक विस्तारित करने की योजना बनाई है।

पुणे जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) ने छात्रों की संख्या, स्थानीय आवश्यकता और उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं का गहन सर्वेक्षण करने के बाद इस विस्तार को हरी झंडी दे दी है।

हमारा मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र के छात्र को उनके हमारा मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र के प्रत्येक छात्र को उनके निःशुल्क गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना है। 12वीं तक की सक्षम और आत्मनिर्भर शिक्षण व्यवस्था की दिशा में यह एक ठोस कदम है, जिससे अभिभावकों का सरकारी स्कूलों पर विश्वास और अधिक मजबूत होगा। - गजानन पाटिल, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद पुणे

बेटियों की शिक्षा को मिलेगा नया बल

इस निर्णय का सबसे सकारात्मक प्रभाव ग्रामीण बालिकाओं की शिक्षा पर पड़ेगा। अक्सर देखा गया है कि गांवों में माध्यमिक स्कूलों (9वीं-10वीं) की दूरी अधिक होने के कारण सुरक्षा और परिवहन की चिंताओं के चलते अभिभावक अपनी बेटियों को आगे की पढ़ाई के लिए नहीं भेजते थे। इसके परिणामस्वरूप ग्रामीण क्षेत्रों में लड़कियों का 'ड्रॉप आउट' (स्कूली शिक्षा छोड़ना) अनुपात काफी अधिक था। अब गांव में ही 10वीं तक की शिक्षा मिलने से बेटियों की राह के कांटे दूर होंगे और वे अपनी शिक्षा पूरी कर सकेंगी।

हजारों छात्रों का सपना भी होगा पूरा

जिला परिषद का यह विजन केवल 10वीं तक सीमित नहीं है। प्रशासन का उद्देश्य भविष्य में इन स्कूलों को 12वीं तक ले जाने का है। प्राथमिक शिक्षा अधिकारी संजय नाइकडे ने बताया कि स्थानीय स्तर पर सर्वेक्षण जारी है। जहां भी छात्रों की पर्याप्त संख्या और क्षमता होगी, वहां चरणबद्ध तरीके से उच्च माध्यमिक कक्षाएं शुरू की जाएंगी।

शिक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता

पुणे जिला परिषद के इस कदम की शिक्षा विशेषज्ञों द्वारा सराहना की जा रही है। एक ही छत के नीचे प्राथमिक से माध्यमिक शिक्षा मिलने से न केवल छात्रों का समय बचेगा, बल्कि शिक्षा के स्तर में भी सुधार होगा।

ग्रामीण क्षेत्रों में निजी स्कूलों की भारी फीस से जूझ रहे अभिभावकों के लिए यह निर्णय किसी वरदान से कम नहीं है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिन स्कूलों में आधारभूत ढांचा उपलब्ध है, वहां नए सत्र से ही प्रक्रिया तेज कर दी जाएगी।

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