Nagpur Teachers News: परीक्षा लें या चुनाव ड्यूटी निभाएं? नागपुर में शिक्षकों पर दोहरी मार

Nagpur Teachers Issue: नागपुर में शिक्षकों के सामने परीक्षा और बीएलओ ड्यूटी के बीच संतुलन की चुनौती है। बढ़ते गैर-शैक्षणिक कार्यों और तकनीकी समस्याओं से परेशानी बढ़ी।
Nagpur Teachers News: Take exams or perform election duty? Teachers in Nagpur are facing a double whammy.
नागपुर शिक्षक समस्या( सोर्स: सोशल मीडिया )
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Nagpur Election Work Teachers: नागपुर जिले में इन दिनों शिक्षकों के सामने बड़ी दुविधा खड़ी हो गई है। वे छात्रों की परीक्षाएं लें या बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) के गैर शैक्षणिक कार्यों को पूरा करें। पहले से ही विलंबित चल रहीं प्राथमिक स्कूलों की परीक्षाओं के बीच शिक्षकों पर बढ़ते प्रशासनिक कार्यों का बोझ अब असहनीय होता जा रहा है।

कलेक्टर व जिला निर्वाचन अधिकारी द्वारा 10 अप्रैल को जारी आदेश के अनुसार 21 अप्रैल तक जिले के सभी 12 विधानसभा क्षेत्रों के बीएलओ को उनके मूल कार्यों से कार्यमुक्त कर दिया गया है।

ऐसे में स्कूलों में चल रहीं परीक्षाओं को लेकर मुख्याध्यापकों के सामने बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि परीक्षाएं कराएं या बीएलओ का काम करें। शिक्षकों को पिछले कुछ महीनों से लगातार बीएलओ कार्यों में लगाया जा रहा है।

इसके अलावा 'साधना सप्ताह' के अंतर्गत ऑनलाइन प्रशिक्षण, स्कूल गुणवत्ता मूल्यांकन एवं आश्वासन प्रारूप के तहत 128 मानकों पर आधारित जानकारी अपलोड करना और विद्यार्थियों की गणना के लिए जिओ-टैग फोटोग्राफी जैसे कार्य भी करने पड़ रहे हैं। इन सबके बीच तकनीकी समस्याओं के कारण ऑनलाइन सिस्टम भी सुचारु रूप से काम नहीं कर रहा, जिससे शिक्षकों की परेशानी और बढ़ गई है।

परीक्षा कार्यक्रम पर भी संकट

शिक्षा संचालनालय द्वारा जारी समय सारणी के अनुसार 22 अप्रैल तक परीक्षाएं पूरी कर 2 मई तक परिणाम घोषित करना अनिवार्य है, लेकिन इसी दौरान बीएलओ ड्यूटी और अन्य कार्यों के आदेश आने से परीक्षा प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।

मई में प्रस्तावित जनगणना कार्य के लिए भी शिक्षकों को लगाया जा रहा है। इससे उनकी गर्मी की छुट्टिया भी प्रभावित होने की संभावना है, जिससे शिक्षकों में असंतोष बढ़ रहा है।

महाराष्ट्र राज्य प्राथमिक शिक्षक समिति की ओर से बताया गया कि परीक्षा के दौरान बीएलओ, कर्मयोगी, स्कॉफ और गणना जैसे कार्यों में शिक्षकों को उलझाना बेहद दुभर्भाग्यपूर्ण है। इससे छात्रों की शैक्षणिक गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है, संगठन ने गैर शैक्षणिक कार्यों के लिए अलग से स्वतंत्र व्यवस्था बनाने की मांग की है।

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