पुणे जिला परिषद की पहल से महिला वर्ग में दौड़ी खुशी की लहर, अब महिलाओं को मिलाएगा पूर्ण सम्मान

Pune Zilla Parishad ने महिला सशक्तिकरण के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाने का फैसला लिया है। अब तलाकशुदा, अविवाहित और विधवा महिलाओं को स्वतंत्रता दिवस पर झंडा फहराने का सौभाग्य दिया जाएगा।
पुणे जिला परिषद ने महिला सशक्तिकरण के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाने का फैसला लिया है। अब तलाकशुदा, अविवाहित और विधवा महिलाओं को स्वतंत्रता दिवस पर झंडा फहराने का सौभाग्य दिया जाएगा।
महिला सशक्तिकरण (सौ. सोशल मीडिया )
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Pune News In Hindi: पुणे जिला परिषद ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर विधवा, तलाकशुदा, अलग रह रही या अविवाहित महिलाओं के सशक्तिकरण, आर्थिक स्वतंत्रता और समाज में उचित स्थान सुनिश्चित करने के लिए एक पहल शुरू की है।

इस पहल की शुरुआत पुणे जिला परिषद के सीईओ गजानन पाटिल ने ग्रामीण क्षेत्रों की तीन एकल महिलाओं पुष्पा खेडेकर, 56 साल, परिचर जिला ग्रामीण विकास विभाग, सुरेखा चव्हाण, 54 साल, परिचर महिला बाल कल्याण विभाग और जयश्री वाघमारे, 35 साल परिचर महिला बाल कल्याण विभाग के साथ राष्ट्रीय ध्वज फहराकर की।

पुणे जिले की कई ग्राम पंचायतों ने भी विधवा, तलाकशुदा, अलग रह रही या अविवाहित महिलाओं को तिरंगा फहराने का सम्मान दिया। गजानन पाटिल ने कहा यह पहल इसलिए शुरू की गई है क्योंकि एकल महिलाएं हमारे समाज में सबसे कम प्रतिनिधित्व और उपेक्षित वर्गों में से एक हैं।

खत्म करेंगे कुप्रथाएं

आर्थिक कठिनाइयों से लेकर कानूनी कमजोरियों और सामाजिक अलगाव तक, उनके सामने आने वाली चुनौतियां जटिल हैं और अक्सर अनदेखी की जाती हैं। लंबे समय से हमारे समुदायों में विधवा महिलाओं को प्रतिगामी प्रथाओं का शिकार होना पड़ा है, उनकी पहचान के प्रतीक छीन लिए गए हैं और सामाजिक व धार्मिक जीवन से बहिष्कृत कर दिया गया है। इन प्रथाओं को समाप्त करने का संकल्प लेकर, जिप ने सम्मान बहाल करने और समान अधिकार सुनिश्चित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है।

पुणे जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी गजानन पाटिल ने कहा है कि यह कार्य केवल 65 परीकारनक नहीं था। यह सम्मान, समानता और लचीलेपन का एक सशक्त संदेश था। इस स्वतंत्रता दिवस को वास्तव में ऐतिहासिक बनाने वाला ग्राम पंचायत स्तर पर सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव था। शपथ में इस बात की पुष्टि की गई है कि अविवाहित महिलाओं के साथ हमेशा सम्मान और समानता का व्यवहार किया जाएगा और किसी भी तरह का भेदभाव, अन्याय या उपेक्षा बर्दाश्त नहीं की जाएगी यह उनके सशक्तिकरण, आर्थिक स्वतंत्रता और समाज में उचित स्थान की अपील करता है।

यह पहल सुनिश्चित करती है कि जो महिलाएं कभी हाशिए पर थीं, उनके साथ अब समानता और सम्मान का व्यवहार किया जाएगा, उन्हें कुमकुम, मंगलसूत्र या जोड़ी पहनने का अधिकार होगा, अगर वे चाहें तो, उन्हें सामाजिक और धार्मिक आयोजनों में शामिल किया जाएगा।

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