

Pune Women Celebrate Raksha Bandhan: भारतीय संस्कृति में भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का प्रतीक रक्षाबंधन सबसे पवित्र पर्व माना जाता है। पूरे साल बहनें इस खास दिन का इंतजार करती हैं और भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र बांधकर लंबी उम्र व सुरक्षा की कामना करती हैं। हालांकि, पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ सामाजिक कर्तव्यों का निर्वहन करना भी बहुत महत्वपूर्ण होता है।
इसी सामाजिक सरोकार की एक बेहद मानवीय मिसाल हाल ही में पुणे शहर में देखने को मिली। पुणे स्थित सदर्न कमांड मिलिट्री हॉस्पिटल में केयर टेकर्स सोसाइटी नामक सामाजिक संस्था की महिलाओं ने भर्ती घायल सेना के जवानों के साथ रक्षाबंधन का यह पावन त्योहार मनाया।
संस्था की महिला सदस्यों ने अस्पताल में जाकर उपचार करा रहे भारतीय सेना के वीर जवानों की कलाई पर राखी बांधी, उनकी आरती उतारी, मुंह मीठा कराया और उनके शीघ्र स्वस्थ होने की ईश्वर से कामना की।
अस्पताल के वार्डों में जब बहनें रक्षासूत्र लेकर पहुंचीं। तो वहां का पूरा माहौल पूरी तरह से अत्यधिक भावनात्मक हो गया। देश की सीमाओं और विभिन्न सैन्य अभियानों के दौरान घायल हुए कई जवानों के परिवार इस समय पुणे में मौजूद नहीं हैं।
त्योहार के दिन अपने परिजनों से दूर अस्पताल के बिस्तर पर लेटे इन जवानों ने जब रक्षाबंधन मनाने आई इन बहनों को देखा, तो कई वीर सपूतों की आंखें छलक आई। बहनों के इस निस्वार्थ प्रेम और अपनेपन को देखकर जवानों का दिल भर आया। उन्होंने उदार मन से अपने हाथ उठाकर सभी बहनों को भर-भरकर आशीर्वाद दिया और अपनी मातृभूमि की रक्षा का वचन लिया।
अस्पताल में भर्ती मरीज ही नहीं, बल्कि परिसर में तैनात भारतीय थल सेना के वरिष्ठ अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी इस शानदार पहल की भरपूर सराहना की। अधिकारियों ने भी बहनों से राखी बंधवाकर रक्षाबंधन का यह पर्व बेहद सादगी और उत्साह के साथ मनाया।
भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि ऐसे आयोजनों से अस्पताल में इलाज करा रहे जवानों का मनोबल काफी बढ़ता है और उन्हें यह अहसास होता है कि पूरा देश उनके साथ हर परिस्थिति में पूरी मजबूती के साथ खड़ा है।
पुणे जिले के केयर टेकर्स सोसाइटी की ओर से आयोजित इस प्रेरणादायक और मानवीय कार्यक्रम में संस्था की कई प्रमुख महिला प्रतिनिधि और कार्यकर्ता उपस्थित रहीं। इनमें सपना परदेशी, नयना चव्हाण, श्रुतिका पाडले, नितांशी पालीवाल, अदिति सोनावणे, श्रावणी सोनवणे, हर्षा मोरे और संध्या फडतरे शामिल थीं।
कार्यक्रम को सफल बनाने में कुमार शिंदे, दिलीप भिकुले, रणजीत परदेशी, विजय बेलिटकर और निखिल टेकवड़े का भी विशेष योगदान रहा। इस अनूठे आयोजन ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि यह पर्व केवल सगे रिश्तों तक ही सीमित नहीं रहता है, बल्कि यह राष्ट्रप्रेम का प्रतीक है।