

Road Inspections With Two Wheeler: पुणे के शहरों में गड्डों, बदहाल फुटपाथों और ट्रैफिक की बढ़ती शिकायतों के बीच पुणे महानगर पालिका ने बहुत सख्त रुख अपना लिया है।अब सड़क विभाग के इंजीनियरों और अधिकारियों के लिए चारपहिया वाहन के बजाय दोपहिया वाहन से नियमित स्थल निरीक्षण करना अनिवार्य कर दिया गया है।
इससे सड़क की वास्तविक स्थिति और तकनीकी खामियों का प्रत्यक्ष जायजा लिया जा सकेगा। इस संबंध में मनपा के शहर अभियंता अनिरुद्ध पावसकर ने औपचारिक आदेश जारी कर दिए हैं।
आदेश के अनुसार, संबंधित तकनीकी अधिकारियों और कर्मचारियों को अपने कार्यक्षेत्र की सड़कों, फुटपाथों, चौकों, जल एवं सीवेज लाइन के ढक्कनों, टूट-फूट और अतिक्रमण सहित अन्य सड़क संबंधी समस्याओं का प्रत्यक्ष निरीक्षण करना होगा। इन समस्याओं का समय पर पता लगाकर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
कार्यालयीन आदेश के अनुसार, उपायुक्त, सहायक आयुक्त और मुख्य अभियंताओं को सुबह के सत्र में कम से कम दो घंटे यानी सुबह 9.45 से 11.45 बजे तक अपने नियंत्रण वाले क्षेत्र में अधिकारियों के साथ स्थल निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए थे।
नए सड़क निर्माण, सड़क रखरखाव एवं मरम्मत, दोबारा डामरीकरण सहित अन्य सभी कार्यों की निगरानी करने वाले अधिकारियों को अब प्रत्यक्ष रूप से सड़कों पर उतरकर निरीक्षण करना ही होगा, निरीक्षण के दौरान सड़क और फुटपाथ पर यातायात सुरक्षा, रोड राइडिंग क्वालिटी तथा आवश्यक उपायों के संबंध में विस्तृत रिपोर्ट विभाग
प्रमुख को सौंपनी होगी। आदेश में संबंधित सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से इस नई कार्यप्रणाली को पूरी सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए गए है। किसी भी प्रकार की लापरवाही या कोताही बरतने पर संबंधित अधिकारी और कर्मचारी के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
पुणे प्रशासन का मानना है कि शहर की संकरी सड़कों, आंतरिक मागाँ, चौकों और फुटपाथों का चारपहिया वाहन से निरीक्षण करने पर कई जरूरी खामियां नजरअंदाज हो जाती है। दोपहिया वाहन से निरीक्षण करने पर सड़क की वास्तविक स्थिति, गड्ढे, अतिक्रमण और फुटपाथ की स्थिति को अधिक बारीकी से परखा जा सकेगा।
इसके चलते संबंधित अधिकारियों को मौके पर ही समस्या की सटीक जानकारी मिलने और समाधान में तेजी आने की पूरी उम्मीद है। इस बीच, शहर में गड्ढों के मुद्दे को लेकर मनपा प्रशासन की कार्यप्रणाली पर लगातार गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
म्हालुंगे क्षेत्र में सड़क के गड्ढे के कारण एक बच्चे की दर्दनाक मौत के बाद सड़क सुरक्षा का मुद्दा काफी गरमा गया था। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बाद मनपा प्रशासन की तीखी आलोचना हुई, जिसके दबाव में प्रशासन ने शहर भर के गड्डों को तत्काल प्रभाव से भरने के सख्त निर्देश जारी किए।
खोदी गई सड़कों को दोबारा दुरुस्त करने के लिए पुणे मनपा द्वारा निकाले गए करीब 75 करोड़ रुपये के टेंडर को रद्द करने की नौबत प्रशासन के सामने आई थी। इसके कारण शहर में गड्डों को तत्काल भरने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने की तत्काल जरूरत पैदा हो गई थी।
इसी के तहत प्रत्येक क्षेत्रीय कार्यालय को एक-एक करोड़ रुपये तक की राशि से गड्ढे भरने का काम कराने के विशेष अधिकार दिए गए हैं। इससे लंबी निविदा प्रक्रिया की प्रतीक्षा किए बिना जरूरत वाले स्थानों पर तुरंत गड्ढे भरने का काम आसानी से पूरा किया जा सकेगा।