पुणे का मौसम (सौ. सोशल मीडिया )
Pune News In Hindi: बदलते मौसम और जलवायु परिवर्तन का सीधा असर अब पुणे के नागरिकों के स्वास्थ्य पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है।
पुणे शहर में पिछले कुछ महीनों में गले के संक्रमण, लगातार होने वाली खांसी, जुकाम और सांस संबंधी गंभीर शिकायतों के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। शहर के प्रमुख अस्पतालों और स्थानीय क्लीनिकों में ऐसे मरीजों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं, जिससे स्वास्थ्य विभाग की चिंता भी गहरी हो गई है।
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, दिन और रात के तापमान में अचानक आ रहा बड़ा अंतर, वातावरण में बढ़ती नमी और धूल-मिट्टी इस स्वास्थ्य संकट के मुख्य कारक हैं।
दिन के समय तेज गर्मी और रात में अचानक बढ़ती ठंडक शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर देती है, जिससे वायरल और बैक्टीरियल संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
पुणे के सरकारी और निजी स्वास्थ्य केंद्रों में आने वाले मरीजों के आंकड़ों में लगातार इजाफा हो रहा है। अस्पतालों की ओपीडी में प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में ऐसे मरीज पहुंच रहे है जिन्हें सूखी खांसी और गले में तीव्र दर्द की शिकायत है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण वातावरण में मौजूद सूक्ष्म कणों (पीएम 2.5) की मात्रा बढ़ गई है। ये कारण सांस के माध्यम से फेफड़ों तक पहुंच जाते हैं, जिससे श्वसन नलियों में सूजन, एलर्जी और ब्रोंकाइटिस जैसी समस्याएं पैदा हो रही है।
इसके अतिरिक्त, शहर में चल रहे विभिन्न निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल और वाहनों के धुएं ने स्थिति को और भी विकट बना दिया है। छोटे बच्चे और बुजुर्ग, जिनकी प्रतिरोधक क्षमता कम होती है, इस बदलाव की सबसे पहली चपेट में आ रहे हैं।
शहर में बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य और बढ़ते वाहनों के कारण श्वसन संबंधी बीमारियां बढ़ रही है। नागरिकों को बाहर निकलते समय मास्क का उपयोग और नियमित हैड वॉश सुनिश्चित करना चाहिए, किसी भी लक्षण को नजरअंदाज न करें और समय पर चिकित्सीय सलाह लें।
-डॉ। दत्ता शेट्टे, पल्मोनोलॉजिस्ट
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