खड़कवासला डैम (सौ. सोशल मीडिया ) 
पुणे

Pune Water Crisis: मानसून की देरी ने बढ़ाई चिंता, पुणे में पानी बचाने के लिए सख्त प्रतिबंधों की तैयारी

Pune Water Crisis: मानसून की देरी और बांधों में घटते जलसंग्रह के कारण जल संकट गहराता जा रहा है। स्विमिंग पूल पर रोक और निर्माण कार्यों में पेयजल के उपयोग पर बैन जैसे उपायों पर विचार कर रहा है।

अपूर्वा नायक

Pune Water Crisis Dam Storage News: मानसून के आगमन में हो रही देरी और बांधों में तेजी से घटते जलसंग्रह के कारण पुणे शहर पर जल संकट के बादल मंडराने लगे हैं। शहर को पानी उपलब्ध कराने वाली खडकवासला बांध श्रृंखला में फिलहाल केवल 5।1 टीएमसी पानी शेष बचा है।

इस गंभीर स्थिति को देखते हुए महापौर मंजुषा नागपुरे ने प्रशासन को अगले दो दिनों में जल प्रबंधन की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही संभावित पानी कटौती की तैयारी करने के आदेश भी दिए गए हैं। ऐसे में आगामी सोमवार से शहर में जलापूर्ति पर प्रतिबंध लागू होने की संभावना बढ़ गई है।

सर्वदलीय बैठक में गंभीर मसले पर हुई चर्चा

महापौर मंजुषा नागपुरे ने कहा कि शहर अब पानी कटौती लागू करने की स्थिति में पहुंच चुका है। इस संबंध में अंतिम निर्णय और परिपत्र अगले दो दिनों में मनपा आयुक्त नवल किशोर राम द्वारा जारी किया जाएगा। जल संकट को देखते हुए वॉशिंग सेंटर, स्विमिंग पूल और निर्माण श्रमिकों के कैंपों में उपयोग होने वाले पेयजल की आपूर्ति बंद करने का प्रस्ताव भी विचाराधीन है।

इसके साथ ही शहरभर में 'सेव वाटर' अभियान चलाकर नागरिकों को पानी बचाने के लिए जागरूक किया जाएगा। संभावित संकट को लेकर महापौर की अध्यक्षता में सर्वदलीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों और मनपा प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।

बैठक में जलापूर्ति की स्थिति, संभावित कटौती और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन पर विस्तार से चर्चा की गई, महापौर ने बताया कि 'अल नीनों' के प्रभाव के कारण इस वर्ष सामान्य से कम वर्षा होने का अनुमान है। जून माह शुरू होने के बावजूद शहर और बांधों के जलग्रहण क्षेत्रों में अपेक्षित बारिश नहीं हुई है। ऐसे में उपलब्ध जलसंग्रह को मुख्य रूप से पेयजल के लिए सुरक्षित रखना प्रशासन की प्राथमिकता बन गया है।

पानी की बर्बादी रोकने की प्रशासन कर रहा व्यापक तैयारी

पानी की बर्बादी रोकने के लिए पुणे मनपा सख्त कदम उठाने जा रही है। पेयजल से वाहन धोने और स्विमिंग पूल संचालित करने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की तैयारी है। शहर में प्रतिदिन लगभग 300 मिलियन लीटर सीवेज जल का शोधन किया जाता है, जिसे निर्माण परियोजनाओं, लेबर कैपों और उद्यानों में उपयोग करना अनिवार्य किया जाएगा, नियमों का उल्लंघन करने वाले निर्माण स्थलों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर उडनदस्तों के माध्यम से कार्रवाई की जाएगी।

1500 MLD पानी की जरूरत

पुणे शहर को प्रतिदिन लगभग 1500 एमएलडी पानी की आवश्यकता होती है। वर्तमान में उपलब्ध जलसंग्रह में से लगभग 3 टीएमसी पानी शहर की जरूरतों के लिए सुरक्षित रखने की योजना है। यदि मानसून में और देरी होती है तो जलापूर्ति पर कड़े प्रतिबंध लगाना अपरिहार्य हो सकता है। प्रशासन एक दिन छोड़कर जलापूर्ति करने, स्विमिंग पूल भरने पर रोक लगाने, निर्माण कार्यों में पेयजल के उपयोग पर प्रतिबंध तथा व्यावसायिक उपयोग को नियंत्रित करने जैसे विकल्पों पर विचार कर रहा है।

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