

पुणे शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की मतगणना के दौरान मतपेटी से चिट्ठी मिली।
चिट्ठी में पुरानी पेंशन योजना लागू करने की पुरजोर मांग की गई।
मतपेटियों की सील टूटने से चुनावी प्रक्रिया और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठे।
MLC Election Teacher Letter Old Pension Scheme In Ballot Box: विधान परिषद के पुणे शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की मतगणना के दौरान एक मतपेटी से मिली चिट्ठी चर्चा का विषय बन गई। एक शिक्षक मतदाता ने चिट्ठी में पुरानी पेंशन योजना लागू करने की मांग करते हुए लिखा, हमें कोई भी खरीद नहीं सकता। 2004 से पहले वाली पुरानी पेंशन योजना लागू करो, नहीं तो देख लेना। मतगणना केंद्र पर मौजूद प्रत्याशियों के प्रतिनिधियों ने चिट्ठी वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपने की मांग की।
मंगलवार सुबह 8 बजे पुणे शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की मतगणना शुरू हुई। मतपेटियां खोलकर मतपत्रों के बंडल बनाए जा रहे थे। इसी दौरान टेबल नंबर दो पर मतगणना के दूसरे दौर में पुणे जिले के राजेवाड़ी बूथ की मतपेटी खाली करते समय एक चिट्ठी नीचे गिर गई।
मतगणना केंद्र पर मौजूद प्रत्याशियों के प्रतिनिधियों के अनुसार, उन्होंने अधिकारियों से पहले मतपत्रों के बंडल तैयार करने और फिर चिट्ठी पढ़कर सुनाने का अनुरोध किया। प्रक्रिया पूरी होने के बाद अधिकारियों ने चिट्ठी पढ़कर सुनाई। इसमें पुरानी पेंशन योजना लागू करने की मांग की गई थी। चिट्ठी सामने आने के बाद प्रतिनिधियों ने इसे वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपने के लिए कहा।
मतगणना केंद्र पर प्रत्याशियों के प्रतिनिधियों को पेन, कागज, घड़ी और यहां तक कि वाहन की चाबी भी साथ ले जाने से रोके जाने की बात सामने आई। इसे लेकर कुछ प्रतिनिधियों और पुलिसकर्मियों के बीच विवाद हुआ।
पुणे स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की मतगणना के दौरान महाविकास आघाड़ी की प्रत्याशी हर्षदा देशमुख-जाधव ने आठ मतपेटियों की सील के तार टूटे होने पर आपत्ति जताई। उन्होंने मतगणना अधिकारियों के समक्ष यह मुद्दा उठाया। इसके बाद कुछ समय के लिए मतगणना रोक दी गई।
इस घटना ने चुनावी प्रक्रिया और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मतपेटियों से इस तरह पत्र का बाहर आना और पुणे शहर में मतपेटियों की सील टूटने जैसी घटनाएं पूरी प्रक्रिया पर अविश्वास और निराशा का माहौल पैदा करती हैं। प्रतिनिधियों में उपजी यह चिंता केवल एक पत्र या पुरानी पेंशन की मांग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मतदान की गोपनीयता, सुरक्षा और निष्पक्षता पर गहरा अविश्वास दर्शाती है।
(पुणे से समीर सय्यद की रिपोर्ट)