मेडल नहीं जीता, दो लोगों की जान ली है;Pune Porsche Case के आरोपी के वायरल वीडियो पर भड़के पीड़िता के पिता
Pune Porsche Case के आरोपी विशाल अग्रवाल और उनकी पत्नी के जश्न वाले वीडियो पर पीड़िता के पिता सुरेश कोष्टा ने तीखा प्रहार किया है। जानें उन्होंने क्यों कहा कि कानून अमीरों की जेब में है?
- Written By: गोरक्ष पोफली
पीड़िता के पिता (सोर्स: डिजाइन फोटो)
Kalyani Nagar Accident Justice: पुणे के कल्याणी नगर में मई 2024 में हुए भीषण पोर्शे कार हादसे ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। Pune Porsche Case में मुख्य आरोपी के पिता, बिल्डर विशाल अग्रवाल और उनकी पत्नी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, जिसने जनता और पीड़ित परिवारों के आक्रोश को फिर से भड़का दिया है। इस वीडियो के सामने आने के बाद हादसे का शिकार हुई लड़की के पिता ने अपनी नाराजगी व्यक्त की है।
पीड़ित परिवार की तीखी प्रतिक्रिया
वीडियो सामने आने के बाद हादसे की शिकार हुई अश्विनी कोष्टा के पिता, सुरेश कोष्टा ने अत्यंत कड़ा रोष व्यक्त किया है। उनके अनुसार, यह घटनाक्रम अपराधियों की संवेदनहीनता को दर्शाता है। उन्होंने कहा, यह उनकी सोसाइटी में होगा कि दो-दो लोगों की जान ले लो और फिर जश्न मनाओ। कोई भी सभ्य समाज ऐसा नहीं कर सकता कि अपने नाबालिग बच्चे को गाड़ी दिलाई, उसने एक्सीडेंट किया और आप ऐसे जश्न मना रहे हैं जैसे कोई मेडल जीत लिया हो या बहुत बड़ा प्रोजेक्ट पूरा कर लिया हो। यह सीधे तौर पर आम जनता का माखौल उड़ाया जा रहा है। ये लोग हमारे जैसे पीड़ितों के ऊपर जूते मार रहे हैं और चिढ़ा रहे हैं कि हमारा कुछ नहीं होने वाला, तुम रोते रहना और कानून हमारी जेब में है।
#WATCH | 2024 Pune Porsche crash case | Jabalpur, MP: On bail to the juvenile accused and viral video of celebration by his family, Suresh Koshta, father of Ashwini – one of the deceased, says, “It must be a practice in their society to kill two people and then celebrate…They… pic.twitter.com/BcZ8sikInJ — ANI (@ANI) May 27, 2026
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कानून और न्याय व्यवस्था की विफलता
सुरेश कोष्टा ने आगे कहा कि आम जनता का माखौल खुद कानून उड़ा रहा है क्योंकि उसने नाबालिग होने के नाम पर सजा से बचने का प्रावधान दे रखा है। पुणे पोर्शे केस हो या दिल्ली का मामला, जनता का विश्वास कानून से उठता जा रहा है क्योंकि किसी को कानून का भय नहीं रहा। ट्रायल कोर्ट या हाई कोर्ट सजा देती भी है, तो सुप्रीम कोर्ट अपराधियों को जमानत देकर अपराध को बढ़ावा दे रहा है। जब तक भारत में विदेशों या मुस्लिम देशों की तरह जान के बदले जान और आंख के बदले आंख जैसा कड़ा कानून नहीं आएगा, तब तक कोई सुधार नहीं होने वाला।
माता-पिता की जिम्मेदारी और सजा की मांग
उन्होंने कहा कि जो मां-बाप अपने बच्चों को अपराध करने के लिए खुला छोड़ देते हैं, उन पर लगाम कौन लगाएगा? प्रशासन और कानून को कड़ाई से पेश आना होगा। पुलिस के पास जाओ तो एफआईआर नहीं होती, और अगर हो जाए तो सही धाराएं नहीं लगतीं। मेरा मानना है कि इन मां-बाप पर सीधा धारा 302 लगनी चाहिए, क्योंकि वे भी इस अपराध में बराबर के हकदार हैं। अगर वे गाड़ी नहीं देते, तो किसी की जान नहीं जाती।
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जमानत रद्द करने की अपील और चेतावनी
उन्होंने अपील कि जिस भी कोर्ट ने इन्हें जमानत दी है, उसे तुरंत रद्द किया जाना चाहिए और इनके मां-बाप को जेल भेजा जाना चाहिए। वे विक्टिम का मजाक उड़ा रहे हैं। मैं स्पष्ट कहना चाहता हूं कि यदि आप किसी की जान ले रहे हैं, तो किसी दिन कोई बड़ी गाड़ी वाला आपको भी उसी तरह कुचल सकता है, फिर क्या होगा? समाज को बदलने का काम कानून का है और जब तक कानून रखवालों के प्रति हमदर्दी नहीं रखेगा, ऐसा मजाक उड़ता ही रहेगा।
