

पुणे मनपा की 8 नई स्कूलों को CBSE की मंजूरी।
करीब 17 हजार विद्यार्थियों को मिलेगा राष्ट्रीय पाठ्यक्रम।
शहर के 8 प्रभागों में खुलेंगे नए विद्यालय।
गणित और विज्ञान की पढ़ाई को मिलेगा बढ़ावा।
Pune Municipal Corporation: पुणे शहर के महानगरपालिका (मनपा) स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए अच्छी खबर है। महाराष्ट्र सरकार ने पुणे मनपा की 8 नई स्कूलों को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के पाठ्यक्रम के अनुसार शुरू करने के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) जारी कर दिया है।
इस फैसले से शहर के करीब 17 हजार विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर की शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। इससे मनपा स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
अब तक मनपा स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को राज्य स्तर के पाठ्यक्रम के अनुसार शिक्षा मिल रही थी। ऐसे में राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते समय उन्हें कई बार पाठ्यक्रम से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ता था। CBSE पाठ्यक्रम लागू होने से विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर की शिक्षा प्रणाली को समझने और उसके अनुरूप तैयारी करने में मदद मिलेगी।
नई व्यवस्था के तहत गणित, विज्ञान और अन्य प्रमुख विषयों की पढ़ाई को बेहतर बनाने पर जोर रहेगा। इससे विद्यार्थियों को आगे की पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मजबूत शैक्षणिक आधार तैयार करने का अवसर मिलेगा।
महाराष्ट्र सरकार से एनओसी मिलने के बाद पुणे मनपा की ओर से आठ विद्यालयों में CBSE पाठ्यक्रम शुरू करने का रास्ता साफ हो गया है। इन स्कूलों को शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में संचालित करने की योजना है।
ए.पी.जे. अब्दुल कलाम स्कूल: कर्वेनगर-वारजे-कर्वेनगर प्रभाग।
स्कूल क्रमांक 62 बी: वानवड़ी प्रभाग क्रमांक 18।
रामचंद्र बनकर स्कूल: हडपसर-मांजरी प्रभाग।
लहुजी सालवे स्कूल: येरवडा-वडगांव शेरी प्रभाग।
स्कूल क्रमांक 83 बी: हडपसर-मांजरी प्रभाग।
स्कूल क्रमांक 102 जी: धानोरी-नगर रोड-वाघोली प्रभाग।
स्कूल क्रमांक 203 बी: वडगांव बुद्रुक-सिंहगढ़ रोड प्रभाग।
नई शाला: कोंढवा-उंड्री प्रभाग।
इन आठ विद्यालयों में CBSE पाठ्यक्रम शुरू होने से पुणे मनपा स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को निजी स्कूलों की तरह राष्ट्रीय स्तर के पाठ्यक्रम के अनुरूप शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। करीब 17 हजार विद्यार्थियों को इसका लाभ मिलने की उम्मीद है। इस पहल से सरकारी स्कूलों में शिक्षा के स्तर को मजबूत करने और विद्यार्थियों के लिए आगे की शैक्षणिक संभावनाएं बढ़ाने में मदद मिल सकती है।