

पुणे मनपा के 32 गांवों में ड्रेनेज कार्यों की 350 करोड़ तक की निविदाओं पर आपत्ति।
निलेश निकम ने छोटी निविदाओं की मांग करते हुए पीआईएल की चेतावनी दी।
गुणवत्ता जांच, जियो टैगिंग और पारदर्शी प्रक्रिया पर जोर।
Pune PMC Drainage Line STP Integrated Tender: पुणे महानगरपालिका (मनपा) में शामिल 32 गांवों में ड्रेनेज लाइन बिछाने और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) स्थापित करने के लिए बड़ी राशि की एकीकृत निविदाएं जारी करने पर विवाद खड़ा हो गया है।
विपक्ष के नेता एड. निलेश निकम ने इस प्रक्रिया पर आपत्ति जताते हुए गांववार या जल निकासी क्षेत्र के आधार पर अलग-अलग छोटी निविदाएं जारी करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि प्रशासन ने उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया, तो सार्वजनिक धन की बर्बादी रोकने के लिए उच्च न्यायालय में जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की जाएगी।
निकम के अनुसार, इन परियोजनाओं के लिए करीब 300 से 350 करोड़ रुपये की निविदाएं जारी किए जाने की संभावना है। उनका दावा है कि इतनी बड़ी निविदाओं के कारण स्थानीय सक्षम ठेकेदारों के लिए प्रतिस्पर्धा में भाग लेने के अवसर सीमित हो सकते हैं। बड़े ठेकेदार काम के छोटे हिस्से स्थानीय ठेकेदारों को सौंप सकते हैं, जिससे काम की गुणवत्ता और लागत को लेकर सवाल खड़े हो सकते हैं।
उन्होंने यह भी आशंका जताई कि परियोजनाओं को पूरा होने में अधिक समय लगने पर मूल्य वृद्धि के कारण मनपा पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है। सड़कों की लंबे समय तक खुदाई से यातायात जाम और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ने की बात भी उन्होंने उठाई है।
निकम ने 18 अक्टूबर को ड्रेनेज कार्य के लिए खोदे गए गड्ढे में गिरने से एक बुजुर्ग की मौत की घटना का उल्लेख करते हुए निर्माण कार्यों के दौरान सुरक्षा उपायों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पुणे महानगरपालिका में ड्रेनेज परियोजनाओं में लागत के साथ-साथ नागरिकों की सुरक्षा और काम की गुणवत्ता पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।
निकम ने निविदा शर्तों में सभी आवश्यक सरकारी अनुमतियां प्राप्त करने की जिम्मेदारी ठेकेदार पर डालने का सुझाव दिया है। इसके अलावा, परियोजना पूरी होने तक संबंधित अभियंताओं के तबादले रोकने और ड्रेनेज लाइनों की लंबाई, गहराई तथा मैनहोल की जियो-टैगिंग कर जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है।
उन्होंने भुगतान से पहले सतर्कता विभाग से काम की गुणवत्ता और माप की जांच कराने, देरी होने पर जुर्माना लगाने, मूल्य वृद्धि की व्यवस्था समाप्त करने और परियोजना सलाहकारों की जवाबदेही तय करने पर भी जोर दिया है। उनका कहना है कि केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप निविदा प्रक्रिया में पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित की जानी चाहिए।