

Mumbai BMC IT Department Scam: मुंबई बीएमसी के सूचना एवं प्रौद्योगिकी (आईटी) विभाग में करोड़ों रुपये के कथित आर्थिक अनियमितताओं की जड़ तक पहुंचने की कोशिश कर रहे सतर्कता विभाग (विजिलेंस) के प्रमुख एम.देवेंद्र सिंह से आईटी विभाग का प्रभार आनन-फानन में वापस ले लिया गया है।
बीएमसी में चर्चा है कि यह कार्रवाई तबादले के बावजूद डेढ़ दशक से अधिक समय से इसी विभाग में जमे हुए कुछ चहेते अभियंताओं को बचाने के लिए की गई है।
हालांकि, सतर्कता विभाग के निर्देश के बाद अब आईटी निदेशक अरुण क्षीरसागर ने इस मामले की जांच आगे भी जारी रखी है। इससे प्रशासनिक हलकों में खलबली मच गई है। आरटीआई कार्यकर्ताओं द्वारा सामने लाई गई जानकारी के अनुसार, आईटी विभाग में मूल रूप से सिविल और मैकेनिकल पृष्ठभूमि वाले राजेंद्र फणसे, विलास कुंभारे और अमित गाडेकर नामक तीन अधिकारी वर्ष 2007 से कार्यरत हैं।
आरोप है कि आईटी क्षेत्र में कोई शैक्षणिक योग्यता या तकनीकी अनुभव नहीं होने के बावजूद ये अधिकारी करोड़ों रुपये की निविदा प्रक्रियाओं और उनकी मंजूरी में सीधे निर्णय ले रहे हैं।
वर्ष 2012 से 2015 के बीच मुंबई बीएमसी के पूरे डेटा सेंटर और उपकरणों के रखरखाव पर महज 66 करोड़ रुपये खर्च हुए थे, लेकिन वर्ष 2015 में अचानक बीएमसी के अपने अत्याधुनिक डेटा सेंटर को बंद कर निजी 'क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर' का इस्तेमाल करने की विवादास्पद योजना बनाई गई। खर्च में बचत होने का दावा किया गया,
लेकिन वास्तविकता में 'कंट्रोल एस' को 50 करोड़ रुपये, 'एबीएम' को 35 करोड़ रुपये और 'ईएसडीएस' को 22 करोड़ रुपये के ठेके दिए गए।
इसके अलावा, मुंबई मनपा के मूल डेटा सेंटर के रखरखाव के लिए अलग से 75 करोड़ रुपये और 23 करोड़ रुपये का एफएमएस ठेका जारी किया गया। इस तरह वर्ष 2018 से 2021 के बीच कुल 198 करोड़ रुपये खर्च किए जाने की जानकारी सामने आई है।
इस कथित महाघोटाले को लेकर विपक्ष की नेता किशोरी पेडणेकर ने अतिरिक्त मनपा आयुक्त को पत्र लिखकर प्रशासन को घेरा है। उन्होंने सवाल उठाया है कि मूल रूप से सिविल इंजीनियर रहे इन अधिकारियों की नियुक्ति आईटी विभाग में किस नियम के तहत की गई?
उनकी नियुक्ति से संबंधित मूल प्रस्ताव, टिप्पणियां और फाइल रिकॉर्ड तत्काल सार्वजनिक किए जाएं। साथ ही, पूरे आर्थिक अनियमितताओं और प्रशासनिक निर्णयों की गहन जांच कर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की जाए,
शिकायतकर्ता संतोष दौंडकर का आरोप है कि आयुक्त के निर्देशों के बावजूद कुछ अधिकारियों के तबादले नहीं किए गए और इसके पीछे आर्थिक लेन-देन की आशंका है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में आयुक्त और सतर्कता विभाग के पास लिखित शिकायत दी गई है।
वहीं, आईटी निदेशक अरुण क्षीरसागर के अनुसार, विभाग में कुछ अधिकारियों के लंबे समय से एक ही पद पर कार्यरत रहने की शिकायतों की जांच कर अंतिम रिपोर्ट अतिरिक्त आयुक्त को सौंप दी गई है। आईटी विभाग की निविदाओं में कथित अनियमितताओं से जुड़ी शिकायतों की जांच अभी जारी है। फिलहाल, जांच पूरी होने और आधिकारिक रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और वित्तीय अनियमितताओं के लिए कौन जिम्मेदार है।