Pune PMC Standing Committee (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Pune Real Estate Tax News: पुणे महानगर पालिका (पीएमसी) के आयुक्त नवल किशोर राम द्वारा वर्ष 2026-27 के लिए 13,995 करोड़ रुपये का प्रस्तावित बजट पेश किए जाने के बाद, अब स्थायी समिति में विभागवार चर्चा शुरू हो गई है। पिछले वर्ष की तुलना में आयुक्त ने बजट के आकार में इस बार 1,377 करोड़ रुपये की वृद्धि की है।
ऐसे में नई योजनाओं और परियोजनाओं के लिए प्रावधान करते समय स्थायी समिति के सामने आय और व्यय के बीच संतुलन बनाए रखने की बड़ी चुनौती है। इसी कारण, माना जा रहा है कि स्थायी समिति आयुक्त द्वारा प्रस्तावित खर्चों में कटौती कर सकती है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इस संभावित कटौती का असर किन विभागों पर पड़ता है।
आयुक्त नवल किशोर राम ने हाल ही में स्थायी समिति के समक्ष आगामी वित्त वर्ष का बजट रखा था। अब इस पर समिति के अध्यक्ष श्रीनाथ भिमाले अध्ययन के बाद अंतिम बजट पेश करेंगे। मंगलवार से शुरू हुई चर्चा में उद्यान, भवन निर्माण, ठोस कचरा प्रबंधन और मोटर वाहन जैसे प्रमुख विभागों पर विमर्श किया गया। खर्च के पहलुओं का अध्ययन पूरा होने के बाद समिति आय के स्त्रोतों पर चर्चा करेगी।
स्थायी समिति के अध्यक्ष 24 मार्च को मनपा का अंतिम बजट पेश करेंगे। इसके लिए मौजूदा नगरसेवकों से उनके वाडों के विकास कार्यों की सूची मांगी गई है, ताकि विभिन्न परियोजनाओं के लिए आवश्यक फंड का प्रावधान किया जा सके।
पुणे बजट में नगरसेवकों को अपने-अपने वार्ड में विकास कार्य कराने के लिए निधि दी जाती है। वार्ड स्तर के विकास कार्यों के लिए ‘सी’ सूची के माध्यम से फंड दिया जाता है। इसमें सत्ताधारी दल के नगरसेवकों को लगभग 5 करोड़ रुपये मिलते हैं, जबकि विपक्षी पार्षदों को इसकी तुलना में करीब 50 प्रतिशत या उससे भी कम राशि प्राप्त होती है।
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18 मार्च को होने वाली जनरल बॉडी मीटिंग में नए ‘मनोनीत नगरसेवकों’ की नियुक्ति पर मुहर लगनी है। हालांकि, बजट प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में होने के कारण इन नए सदस्यों में फंड की उपलब्धता को लेकर चिंता है। संदेह यह है कि आधिकारिक नियुक्ति में देरी के कारण उन्हें इस बजट में विकास कार्यों के लिए पर्याप्त निधि मिल पाएगी या नहीं।
वर्ष 2025-26 का बजट 12,618 करोड़ रुपये का था, जिसे इस बार करीब 11% बढ़ाया गया है। सामान्यतः वार्षिक वृद्धि 500 से 700 करोड़ रुपये के बीच रहती है, लेकिन इस बार संपत्ति कर और निर्माण शुल्क जैसे सीमित आय स्रोतों के बावजूद बड़ी वृद्धि प्रस्तावित है। सत्ताधारी दल के चुनावी वादों और नई योजनाओं को शामिल करने के दबाव में बजट का आकार 15,000 करोड़ रुपये के पार जा सकता है, जिसे विशेषज्ञ ‘अवास्तविक’ मान रहे हैं।