Pune Municipal Corporation सभा में हंगामा, विपक्ष का वॉकआउट, भाजपा ने प्रस्ताव ठुकराया
Pune Municipal Corporation की मुख्य सभा में विपक्ष ने चर्चा के लिए समय न मिलने पर वॉकआउट किया। भाजपा ने बहुमत के बल पर स्थगन प्रस्ताव 95-0 से खारिज कर दिया, जिससे राजनीतिक टकराव बढ़ गया।
- Written By: अपूर्वा नायक
पुणे ड्रेन सफाई में देरी (सोर्सः सोशल मीडिया)
Pune Municipal Corporation Meeting Walkout Opposition: पुणे मनपा की मुख्य सभा में शुक्रवार को भारी हंगामा और राजनीतिक गतिरोध देखने को मिला।
विपक्षी दलों ने सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर लोकतांत्रिक मूल्यों के हनन और मनमानी का आरोप लगाते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया।
विपक्ष की मुख्य नाराजगी सभा के संचालन के तरीके और नगरसेवकों को जनहित के मुद्दों पर अपनी बात रखने के लिए पर्याप्त समय न दिए जाने को लेकर थी। विपक्ष के नेता निलेश निकम ने सदन की कार्यवाही शुरू होते ही एक ‘स्थगन प्रस्ताव’ पेश किया।
सम्बंधित ख़बरें
NCP विलय की खबरों के बीच शरद पवार ने PM मोदी को दिया बारामती आने का न्योता, महाराष्ट्र में बदलेगी सियासी हवा?
12,937 करोड़ की पुणे मेट्रो फेज-2 को मंजूरी, पिंपरी-चिंचवड़ में मेट्रो नेटवर्क का बड़ा विस्तार
101 साल का हुआ पुणे रेलवे स्टेशन, रोज 1.70 लाख यात्रियों की जीवनरेखा बना ऐतिहासिक जंक्शन
खत्म हो रहा है सब्र, अजित पवार विमान दुर्घटना की जांच में हो रही देरी पर भड़के युगेन्द्र पवार, पूछा सवाल
उन्होंने मांग की कि इस बैठक को केवल एक दिन में सीमित न कर आगामी दो से तीन दिनों तक चलाया जाए, निकम का तर्क था कि शहर के विस्तार और बढ़ती नागरिक समस्याओं को देखते हुए सभी नगरसेवकों को अपने प्रभाग के मुद्दों पर विस्तार से चर्चा करने और प्रशासन से जवाब मांगने के लिए अधिक समय चाहिए।
95 VS 0 मतों से प्रस्ताव खारिज
जब स्थगन प्रस्ताव पर मतदान की स्थिति आई, तो सताधारी भाजपा ने अपने संख्या बल के आधार पर विपक्ष की मांग को ठुकरा दिया। इससे क्षुब्ध होकर विपक्षी नगरसेवक नारेबाजी करते हुए सदन से बाहर चले गए। विपक्ष की अनुपस्थिति में भाजपा ने 95 बनाम 0 मतों से स्थगन प्रस्ताव को खारिज कर दिया और सभा की कार्यवाही जारी रखी।
ये भी पढ़ें :- Pune Water Crisis: फ्लैट खरीदारों को टैंकर पर छोड़ने वाले बिल्डरों पर सख्ती की मांग, PMC में छिड़ा बवाल
पत्रकार परिषद में साधा निशाना
सदन से वॉकआउट करने के बाद विपक्षी नेताओं ने मीडिया के समक्ष अपनी भूमिका स्पष्ट करते हुए कहा कि भाजपा का यह तानाशाही रवैया लोकतंत्र के खिलाफ है। विपक्षी नगरसेवकों ने चेतावनी दी कि यदि जनप्रतिनिधियों को जनहित के मुद्दे उठाने से रोका गया, तो वे सड़क पर उतरकर अपना विरोध दर्ज कराएंगे।
