

पुणे के मुलशी तहसील की माले ग्रामपंचायत में कथित फर्जी ग्रामसभा और धोखाधड़ी की जांच शुरू।
ग्रामसभा के कार्यवृत्त, प्रस्तावों और हस्ताक्षरों की प्रामाणिकता की पड़ताल जारी।
सरपंच, उपसरपंच और ग्रामसेवक की भूमिका जांच रिपोर्ट के बाद स्पष्ट होगी।
Pune Mulshi Male Gram Panchayat Fake Meeting: मुलशी तहसील की माले ग्रामपंचायत में कथित फर्जी ग्रामसभा आयोजित करने और गलत प्रस्ताव तैयार कर धोखाधड़ी करने के आरोपों की आधिकारिक जांच शुरू हो गई है। ग्रामीण राजेश श्रीधर सातपुते और सदस्य चेतन राजेंद्र आढावड़े की लिखित शिकायत पर पुणे जिला परिषद तथा मुलशी पंचायत समिति ने कार्रवाई शुरू की है।
गुट विकास अधिकारी (बीडीओ) और नियुक्त विशेष जांच अधिकारी शिकायत से जुड़े दस्तावेजों, बैठक के कार्यवृत्तों और हस्ताक्षरों की जांच कर रहे हैं। जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि ग्रामसभा आयोजित किए बिना ही अभिलेखों में बैठकों का उल्लेख किया गया था या नहीं। इसके साथ ही ग्रामसभा के कार्यवृत्त में दर्ज प्रविष्टियों, पारित प्रस्तावों और ग्रामीणों के नाम पर किए गए हस्ताक्षरों की प्रामाणिकता भी जांची जा रही है। पुणे जिला परिषद के पंचायत विभाग ने मुलशी के बीडीओ को शिकायत के सभी बिंदुओं की नियमानुसार जांच कर त्वरित कार्रवाई करने और शीघ्र तथ्यात्मक रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं।
पुणे शहर के मुलशी पंचायत समिति ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए विशेष जांच अधिकारी नियुक्त किया है। अधिकारी को शिकायत के प्रत्येक पहलू का सत्यापन कर रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इसके तहत मूल अभिलेखों, कार्यवाही रजिस्टरों, पारित प्रस्तावों और नमूना हस्ताक्षरों की पड़ताल की जा रही है। संबंधित पक्षों को 23 सितंबर को पंचायत समिति कार्यालय में उपस्थित रहने के लिए नोटिस जारी किया गया था। उन्हें जांच के दौरान सभी मूल दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे।
फिलहाल ग्रामसभा और प्रस्तावों में अनियमितता के आरोपों की जांच जारी है। दस्तावेजों के सत्यापन और संबंधित पक्षों की भूमिका स्पष्ट होने के बाद ही मामले में आगे की कार्रवाई तय होगी।
माले ग्रामपंचायत के सरपंच, उपसरपंच और ग्रामसेवक की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
हालांकि, इनकी जिम्मेदारी जांच पूरी होने और तथ्यों की पुष्टि के बाद हो स्पष्ट होगी।
महाराष्ट्र ग्रामपंचायत अधिनियम के तहत की जा रही इस जांच के नतीजों पर ग्रामीणों की नजरें टिकी हैं।