

Pune DPCC Fund Allocation Mahayuti Formula: पुणे में चालू वित्त वर्ष के छह महीने बीत जाने के बावजूद पुणे जिला नियोजन समिति (डीपीसीसी) के निधि आवंटन का विवाद नहीं सुलझ पाया है। महायुति गठबंधन में भाजपा, शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेताओं के बीच निधि वितरण के नए फॉर्मूले को लेकर खींचतान जारी है।
इसका सीधा असर जिले के विकास कार्यों पर पड़ रहा है। पालकमंत्री एवं उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार की अध्यक्षता में 1,472 करोड़ रुपये का वार्षिक प्रारूप मंजूर किया गया था, लेकिन निधि आवंटन पर सहमति नहीं बनने से विकास योजनाएं अब तक जमीन पर नहीं उतर पाई हैं।
मुंबई में महायुति के शीर्ष नेताओं की बैठक के बाद निधि आवंटन के नए राजनीतिक फॉर्मूले की चर्चा तेज हो गई है। चर्चा के अनुसार, कुल उपलब्ध निधि का 70 प्रतिशत हिस्सा विधायकों के निर्वाचन क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए आवंटित करने का प्रस्ताव है।
वहीं, शेष 30 प्रतिशत निधि पालकमंत्री एवं उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के स्वेच्छा अनुदान और विशेषाधिकार के तहत रखे जाने की बात कही जा रही है। इस फॉर्मूले के लागू होने पर ग्रामीण क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाली जिला परिषद के हिस्से में महज 28 करोड़ रुपये आने की संभावना है। इससे जिला परिषद के सदस्यों और ग्रामीण जनप्रतिनिधियों में नाराजगी बढ़ गई है।
जिला परिषद के विभिन्न लेखा शीर्षों के माध्यम से हर साल करीब 900 करोड़ रुपये के विकास कार्य किए जाते रहे हैं। इसके मुकाबले नए फॉर्मूले के तहत जिला परिषद को केवल 28 करोड़ रुपये मिलने की संभावना ग्रामीण विकास के लिए बड़ी चुनौती मानी जा रही है।
निधि में संभावित भारी कटौती से ग्रामीण क्षेत्रों में विकास योजनाओं के क्रियान्वयन पर असर पड़ने की आशंका है। दूसरी ओर, राज्य सरकार की ओर से अब तक निधि आवंटन का आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया गया है। इसके चलते प्रशासनिक स्तर पर भी विकास कार्यों से संबंधित प्रस्तावों पर निर्णय अटका हुआ है।
विधान परिषद चुनाव की आचार संहिता लागू, होने के कारण निधि आवंटन का विवाद नवंबर से पहले सुलझने की संभावना कम बताई जा रही है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों के विकास कार्यों के लिए निधि उपलब्ध होने में और देरी हो सकती है। राजनीतिक खींचतान के बीच जिला परिषद के जनप्रतिनिधियों की चिंता बढ़ गई है।
निधि आवंटन को लेकर जारी गतिरोध के बीच प्रशासन ने सूखे की स्थिति से निपटने के लिए अलग प्रस्ताव तैयार किया है। इसके तहत मुख्य बजट आवंटन में कटौती किए बिना कुल निधि का 5 प्रतिशत हिस्सा जल संरक्षण, चारा शिविरों और आपातकालीन सूखा राहत उपायों के लिए सुरक्षित रखने का प्रस्ताव है।
प्रशासन को उम्मीद है कि राज्य सरकार इस प्रस्ताव को जल्द मंजूरी देगी। इससे सूखा प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक उपायों के लिए निधि उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।