

Pune Gunjwani Project Lift Irrigation Schemes: पुणे जिले के गुंजवणी परियोजना के तहत संशोधित जल नियोजन को राज्य सरकार ने मंजूरी दी है। राजगढ़ और भोर तहसीलों में तीन स्वतंत्र लिफ्ट सिंचाई योजनाओं के जरिए 1,930.61 हेक्टेयर अतिरिक्त कृषि भूमि को सिंचाई का लाभ मिलने की उम्मीद है।
पुणे जिले के गुंजवणी परियोजना के तहत वाजेघर, वांगणी और शिवगंगा घाटियों में सिंचाई के लिए पानी के उपयोग को लेकर तैयार संशोधित जल नियोजन को राज्य सरकार ने मंजूरी दे दी है। जल संसाधन विभाग ने 30 सितंबर को इस संबंध में निर्णय जारी किया। इससे राजगढ़ और भोर तहसीलों के किसानों की लंबे समय से चली आ रही सिंचाई संबंधी समस्या दूर होने की उम्मीद है।
भोर, राजगढ़ और मुलशी के विधायक शंकर मांडेकर ने शनिवार को मुलशी तहसील के नांद में आयोजित पत्रकार वार्ता में इसकी जानकारी दी।
गुंजवणी परियोजना के तहत घानेची में कर नदी पर बांध का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है और जलाशय में जलभंडारण भी शुरू हो गया है। परियोजना की कुल जलभंडारण क्षमता 3.697 टीएमसी है। इसमें से 3.54 टीएमसी पानी सिंचाई के लिए, जबकि 0.43 टीएमसी पेयजल के लिए आरक्षित किया गया है।
दूसरी संशोधित प्रशासनिक मंजूरी के अनुसार राजगढ़, भोर और पुरंदर तहसीलों में बंद नलिका वितरण प्रणाली तथा लिफ्ट सिंचाई योजनाओं के माध्यम से कृषि भूमि तक पानी पहुंचाने की योजना है।
विधायक शंकर मांडेकर के अनुसार, सरकार ने राजगढ़ की वाजेघर और वांगणी घाटियों तथा भोर की शिवगंगा घाटी के लिए तीन स्वतंत्र लिफ्ट सिंचाई योजनाओं को सैद्धांतिक मंजूरी दी है।
इन योजनाओं से वाजेघर घाटी में 450 हेक्टेयर, वांगणी घाटी में 510.08 हेक्टेयर और शिवगंगा घाटी में 970.58 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र को सिंचाई का लाभ मिलने की उम्मीद है। तीनों योजनाओं को मिलाकर कुल 1,930.61 हेक्टेयर अतिरिक्त कृषि भूमि सिंचाई के दायरे में आएगी।
मांडेकर ने बताया कि वंचित क्षेत्रों के लिए स्वतंत्र सिंचाई योजना को मंजूरी दिलाने के लिए पिछले कई वर्षों से प्रयास किए जा रहे थे। इस मुद्दे को पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार, उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार, जल संसाधन मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटील तथा कृष्णा घाटी विकास महामंडल के अधिकारियों के समक्ष उठाया गया था।
विधानमंडल के विभिन्न सत्रों में भी यह विषय उठाया गया। इसके बाद कृष्णा घाटी विकास महामंडल की ओर से प्रस्ताव भेजा गया और अब संशोधित जल नियोजन को मंजूरी मिलने से प्रशासनिक प्रक्रिया आगे बढ़ने का रास्ता साफ हुआ है।