

Pune Eastern Ring Road Administrative Approval 10502 Crore: वर्षों से भूमि अधिग्रहण और मंजूरियों के फेर में अटका पुणे रिंग रोड का पूर्वी हिस्सा अब आगे बढ़ने की स्थिति में है। सोरतापवाड़ी (वलती) से वरवे बुद्रुक (शिवरे) तक 31.805 किलो मीटर लंबे मार्ग के लिए राज्य सरकार ने 10,502 करोड़ 36 लाख रुपये की प्रशासनिक मंजूरी दी है। सार्वजनिक निर्माण विभाग ने हाल ही में इस संबंध में शासनादेश जारी किया।
मंजूरी के बाद अब इस हिस्से के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है। हालांकि, सड़क का निर्माण तत्काल शुरू नहीं होगा।
ठेकेदार को स्वीकृति पत्र देने से पहले कम से कम 70 प्रतिशत भूमि अधिग्रहित करना होगा, जबकि प्रत्यक्ष निर्माण कार्य शुरू करने के लिए 90 प्रतिशत जमीन एमएसआरडीसी के कब्जे में होना अनिवार्य किया गया है।।
महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास महामंडल (एमएसआरडीसी) के माध्यम से बनने वाला यह मार्ग पुणे-सोलापुर और पुणे-सातारा राष्ट्रीय मार्गों को आपस में जोड़ेगा। साथ ही इसे प्रस्तावित पुणे-छत्रपति शिवाजीनगर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे से भी जोड़ा जाएगा।
इससे पुणे शहर के बाहरी हिस्सों के बीच यातायात के लिए एक वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध होने की उम्मीद है। रिंग रोड के पूरा होने पर शहर के भीतर से गुजरने वाले वाहनों का दबाव कम करने में मदद मिलने की संभावना है।
रिंग रोड के इस हिस्से का निर्माण पहले भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के माध्यम से प्रस्तावित था। हालांकि, एनएचएआई की ओर से परियोजना को प्राथमिकता नहीं मिलने के कारण यह हिस्सा आगे नहीं बढ़ सका।
दूसरी ओर, संबंधित क्षेत्र में भूमि अधिग्रहण के लिए एमएसआरडीसी पहले से ही खर्च कर रहा था। इसे देखते हुए राज्य सरकार ने इस हिस्से की जिम्मेदारी एमएसआरडीसी को सौंपने का निर्णय लिया। खास बात यह है कि मार्गरखा में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया जाएगा।
प्रशासनिक मंजूरी मिलने के बावजूद परियोजना की वास्तविक गति अब भूमि अधिग्रहण पर निर्भर का अधिग्रहण पूरा करना होगा। वहीं, निर्माण कार्य शुरू करने का आदेश तभी दिया जाएगा, जब 90 प्रतिशत भूमि एमएसआरडीसी के कब्जे में आ जाएगी।
इसका मतलब है कि अब सरकार और एमएसआरडीसी के सामने सबसे बड़ी चुनौती जमीन जुटाने की होगी। प्रशासनिक मंजूरी से भूमि अधिग्रहण के लिए आवश्यक वित्तीय व्यवस्था का रास्ता खुल गया है, लेकिन निर्माण स्थल पर मशीनरी उतारने से पहले तय भूमि अधिग्रहण की शर्त पूरी करनी होगी।
पुणे रिंग रोड की पूरी परियोजना को पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों में बांटा गया है। पूर्वी हिस्से में उर्स-सोलू-सोरतापवाड़ी तथा पश्चिमी हिस्से में उर्से-वरवे बुद्रुक मार्ग के लिए पहले ही संशोधित प्रशासनिक मंजूरी दी जा चुकी है। अब सोरतापवाडी से वरवे बुद्रुक के 31.805 किलोमीटर हिस्से को भी मंजूरी मिलने के बाद रिंग रोड की नियोजित कुल लंबाई 168.981 किलोमीटर हो जाएगी।
परियोजना की कुल लागत में केवल सड़क निर्माण ही नहीं, बल्कि भूमि अधिग्रहण, जीएसटी, रॉयल्टी, रखरखाव, वृक्षारोपण, क्षेत्र सौदर्याकरण और सेवा वाहिनियों के स्थानातरण जैसे खर्च भी शामिल है।
अकेले निर्माण कार्य के लिए करीब 5,762 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। वहीं, भूमि अधिग्रहण के लिए 1,500 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए है।
परियोजना के लिए 20 वर्ष की अवधि का कर्ज उठाने को भी मंजूरी दी गई है।
इसके अलावा भूमि अधिग्रहण, निर्माण अवधि के ब्याज और प्रायोजक योगदान के लिए राज्य सरकार ने करीब 4, 195 करोड़ रुपये की व्यवस्था मंजूर की है।
रिंग रोड के इस हिस्से को प्रशासनिक मंजूरी मिलने से परियोजना की कागजी प्रक्रिया का एक बड़ा पड़ाव पार हो गया है। अब नजर भूमि अधिग्रहण की गति पर रहेगी।
70 प्रतिशत जमीन मिलने पर ठेके की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी और 90 प्रतिशत जमीन एमएसआरडीसी के कब्जे में आने के बाद ही वास्तविक निर्माण शुरू होगा।
ऐसे में 31।805 किलोमीटर के इस मार्ग के लिए अगला बड़ा पड़ाव जमीन जुटाना ही होगा।