Pune की हवा हुई जहरीली, AQI 242 पहुंचा; स्मॉग से बढ़ी स्वास्थ्य चिंताएं
Pune का एक्यूआई 242 तक पहुंचकर ‘गंभीर’ श्रेणी में दर्ज किया गया। ट्रैफिक और धूल के कारण PM2.5 और PM10 स्तर खतरनाक रूप से बढ़ गए। डॉक्टरों ने मास्क और सावधानी की सलाह दी है।
- Written By: अपूर्वा नायक
पुणे एक्यूआई (सौ. सोशल मीडिया )
Pune News In Hindi: महाराष्ट्र का सांस्कृतिक और शैक्षिक केंद्र पुणे अब अपनी खराब होती हवा की गुणवत्ता के कारण गंभीर चिंता का विषय बन गया है. शहर में लगातार बढ़ती आबादी, सड़कों पर हर साल लाखों की संख्या में आ रहे नए वाहन और भयानक ट्रैफिक जाम के कारण पुणे की वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 242 स्तर तक खतरनाक से ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुंच गई है.
शहर के चार प्रमुख हिस्सों में हवा की गुणवत्ता इतनी गिर गई है कि नागरिकों के लिए सांस लेना भी मुश्किल हो गया है. दिसंबर की शुरुआत से ही पुणे में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है. सुबह और शाम के वक्त जहां कोहरा दिखना चाहिए, वहां धुएं और धूल के मिश्रण से बना प्रदूषणकारी फॉग (स्मॉग) नजर आ रहा है. प्रदूषण ने गुरुवार को इस मौसम के अपने सबसे उच्चतम स्तर को छू लिया।
वाहनों का धुआं और धूल बने मुख्य विलेन
ठंड के बावजूद हवाओं का न चलना इस स्थिति को और गंभीर बना रहा है, क्योंकि धूल कण वातावरण में मिलकर फैल रहे हैं. शिवाजीनगर, कर्वे रोड, चिंचवड और हडपसर जैसे क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित हैं. इन क्षेत्रों की हवा ‘खराब’ से ‘बहुत खराब’ श्रेणी में पहुंच गई है, जो सीधे तौर पर नागरिकों के स्वास्थ्य को प्रभावित करती है.
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गुरुवार और शुक्रवार को पूरे दिन पुणे की सड़कों पर भारी भीड़ रही. कार्यालयीन समय, शैक्षणिक संस्थानों, बाजारों और प्रमुख चौराहों पर वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं. लगातार जाम के कारण वाहनों के इंजन लंबे समय तक चालू रहे, जिससे डीजल-पेट्रोल के जलने से बड़ी मात्रा में निकला धुआं और धूल कण हवा में मिल गए, नतीजतन, शहर के एक्यूआई के आंकड़े तेजी से बढ़ते गए. चिंचवड में स्थिति सबसे खराब दर्ज की गई, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 242 तक पहुंच गया।
242 तक पहुंचा AQI गुरुवार को सबसे खतरनाक
बात यह रही कि अतिसूक्ष्म और सूक्ष्म धूल कणों की मात्रा दोगुनी हो गई. PM 2.5 (अत्यंत सूक्ष्म कण जो सीधे फेफड़ों में जाते हैं) का सामान्य स्तर 46-50 होता है, लेकिन यह बढ़कर 142 तक चला गया था. इसी तरह, PM 10 का दैनिक औसत 80-100 होता है, लेकिन यह 175 तक पहुंच गया था. ये कण सांस की बीमारियों को सीधे न्यौता देते हैं.
हवा में PM 2.5 और PM 10 की मात्रा बढ़ने से दमा, एलर्जी, खांसी, आंखों में जलन और नाक-गले में दर्द जैसी स्वास्थ्य समस्याएं अधिक बढ़ सकती हैं. छोटे बच्चे, वरिष्ठ नागरिक, गर्भवती महिलाएं और सांस संबंधी बीमारियों वाले लोगों के लिए यह स्थिति विशेष रूप से खतरनाक है।
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डॉक्टरों की सलाह
- डॉक्टरों ने नागरिकों को मास्क का उपयोग करने, संभव हो तो सुबह-शाम आउटडोर जिम से बचने और पानी अधिक मात्रा में पीने की सलाह दी है।पर्यावरण विशेषज्ञों ने साफ किया है कि ट्रैफिक नियंत्रण, सड़कों की धूल कम करने के लिए पानी का छिड़काव, निर्माण स्थलों पर नियमों का कड़ाई से पालन।
- सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना और लगातार मॉनिटरिंग जैसे तत्काल और कड़े कदम उठाए बिना पुणे को इस गंभीर स्थिति से बाहर नहीं निकाला जा सकता है।दिल्ली की तरह ही पुणे में भी सांस पर पहरा लगने के संकेत मिल रहे हैं, जिस पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है।
