Pune Politics: कोथरूड में वार्डों की नई संरचना में भाजपा को 100% फायदा, विपक्ष का आरोप
Pune Municipal Corporation Election:पुणे मनपा चुनाव के लिए के प्रारूप ने पूर्व नगरसेवकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। प्रशासन ने 2017 की वार्ड संरचना को आधार बनाया है।
- Written By: आंचल लोखंडे
पुणे महानगरपालिका (सौजन्यः सोशल मीडिया)
Local Body Election: पुणे मनपा चुनाव के लिए के प्रारूप ने पूर्व नगरसेवकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। प्रशासन ने 2017 की वार्ड संरचना को आधार बनाया है, जिसमें नए शामिल किए गए गांवों को पुराने वार्डों में जोड़ा गया है। इससे पुराने नगरसेवकों के लिए नए क्षेत्रों में प्रचार करना और मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित करना एक बड़ी चुनौती होगी। साथ ही विपक्ष ने बड़ा आरोप लगाते हुए कहा है कि पुणे मनपा चुनाव के लिए वार्डों की नई संरचना में भाजपा ने अपने गढ़ कोथरूड विधानसभा क्षेत्र में ‘शत-प्रतिशत भाजप’ (100% भाजपा) की रणनीति अपनाई है।
पिछले चुनाव में कोथरूड की 20 सीटों में से भाजपा को 14, तत्कालीन शिवसेना को 2, कांग्रेस को 2 और तत्कालीन राष्ट्रवादी कांग्रेस को 2 सीटें मिली थीं। केंद्रीय राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल, महाराष्ट्र के उच्च और तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटिल और सांसद मेधा कुलकर्णी के निर्वाचन क्षेत्र में इस नई वार्ड संरचना से मुख्य रूप से शिवसेना शत-प्रतिशत भाजप’ (100% भाजपा) की रणनीति अपनाई है।
पार्टियों के लिए एक बड़ी चुनौती
पिछले चुनाव में कोथरूड की 20 सीटों में से भाजपा को 14, तत्कालीन शिवसेना को 2, कांग्रेस को 2 और तत्कालीन राष्ट्रवादी कांग्रेस को 2 सीटें मिली थीं। केंद्रीय राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल, महाराष्ट्र के उच्च और तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटिल और सांसद मेधा कुलकर्णी के निर्वाचन क्षेत्र में इस नई वार्ड संरचना के तहत, मांजरी बुद्रुक-साडेसतरा नली, शिवणे-खडकवासला और महंमदवाड़ी (ठाकरे गुट) और कांग्रेस के लिए मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। भाजपा द्वारा बनाई गई इस रणनीति को भेदना इन दोनों पार्टियों के लिए एक बड़ी चुनौती होगी।
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165 नगरसेवक इस नई संरचना
पुणे में होंगे 165 नगरसेवक इस नई संरचना के अनुसार, शामिल किए गए गांवों से कुल 18 नगरसेवक चुने जाएंगे। हालांकि, शहर के मध्य क्षेत्रों के वार्डों में नगरसेवकों की संख्या कम हो गई है, जिससे कई पूर्व नगरसेवकों को उम्मीदवारी के लिए संघर्ष करना पड़ेगा। 2017 में, 40 वार्डों से 160 नगरसेवक चुने गए थे। बाद में, 11 और गांवों को शामिल करने के बाद यह संख्या 162 हो गई। अब, सरकार के नियमों के अनुसार 30 लाख की आबादी के लिए 160 नगरसेवक और हर अगले 1 10 लाख की आबादी के लिए 1 नगरसेवक 29 का प्रावधान किया गया है, जिससे पुणे में कुल नगरसेवकों की संख्या 165 तय की गई है।
वाघोली और लोहगांव से होंगे 2-2 नगरसेवक
नई वार्ड संरचना के तहत, मांजरी बुद्रुक-साडेसतरा नली, शिवणे-खडकवासला और महंमदवाड़ी नगरसेवक इस नई संरचना के अनुसार, शामिल किए गए गांवों से कुल 18 नगरसेवक चुने जाएंगे। हालांकि, शहर के मध्य क्षेत्रों के वार्डों में नगरसेवकों की संख्या कम हो गई है, जिससे कई पूर्व नगरसेवकों को उम्मीदवारी उंड्री इन तीन वाडों से 12 नगरसेवक चुने जाएंगे। वहीं, कात्रज-आंबेगांव वार्ड में नन्हे और अन्य छह-सात गांवों को शामिल किया जाएगा, जहां से 2 नगरसेवक चुने जाएंगे। इसके अलावा, वाघोली और लोहगांव से प्रत्येक से 2 नगरसेवक आएंगे। कुल मिलाकर, इन गांवों से 18 नगरसेवकों का चुनाव होगा। इन गांवों को पुराने वाडों में जोड़ने पूर्व नगरसेवकों के सामने नए प्रतिद्वंद्वी खड़े हो जाएंगे। गांवों में श्गावकी भावकीर (गांव और रिश्तेदारी) की राजनीति अधिक प्रभावी होने से पुराने नगरसेवकों के लिए वोट पाना अधिक कठिन होगा। स
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पुराने 23 गांवों को लगा तगड़ा झटका
इस प्रारूप वार्ड संरचना का सबसे ज्यादा असर उन 23 गांवों पर पड़ेगा जो 1998 से 2000 के बीच मनपा में शामिल हुए थे। ऐसा इसलिए है क्योंकि नए 32 गांवों को सीधे इन 23 गांवों के वार्डों में मिला दिया गया है। आबादी के आधार पर वार्डों की संरचना की गई है, जिससे नए गांवों की आबादी तुलनात्मक रूप से कम होने के बावजूद, पिछले कुछ वर्षों में उनकी मतदाता संख्या तेजी से बढ़ी है। इसलिए, अगर इन नए 32 गांवों से प्रतिनिधि चुने जाते हैं, तो पुराने 23 गांवों का प्रतिनिधित्व काफी कम हो जाएगा।
प्रमुख वार्डों में बदलाव
मयूर कॉलोनी-डहाणूकर कॉलोनी : पिछले चुनाव में शिवसेना के दो नगरसेवक, पूर्व विधायक शशिकांत सुतार के बेटे पृथ्वीराज सुतार और वासंती जाधव, यहां से जीते थे। केंद्रीय राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल भी इसी वार्ड के नगरसेवक थे। अब इस वार्ड का नाम ‘मयूर कॉलोनी-कोथरूड’ कर दिया गया है, जिसमें से डहाणूकर कॉलोनी का हिस्सा हटा दिया गया है। इस वार्ड की रचना इस तरह की गई है कि इसमें पूरी तरह से भाजपा का पारंपरिक वोट बैंक शामिल है, जिससे शिवसेना (ठाकरे गुट) के लिए चुनौती खड़ी हो गई है।
रामबाग कॉलोनी-शिवतीर्थनगर : यह वार्ड मुख्य रूप से झुग्गी-झोपड़ियों का क्षेत्र है। पिछले चुनाव में यहां से कांग्रेस के केवल दो नगरसेवक रामचंद्र उर्फ चंदू कदम और वैशाली मराठे ही जीते थे। राष्ट्रवादी कांग्रेस (अजीत पवार गुट) के पूर्व शहराध्यक्ष दीपक मानकर का इस वार्ड में दबदबा है, और वे लगातार जीतते रहे हैं। भाजपा ने इस बार वार्ड की रचना में झुग्गी-झोपड़ियों के साथ-साथ पारंपरिक रूप से भाजपा को वोट देने वाली सोसायटियों के क्षेत्र को भी जोड़ा है।
