पुणे में अल्टरनेट डे पानी सप्लाई से मचा हाहाकार: 15 दिन में आई 1500 शिकायतें, टैंकर माफिया कर रहे मोटी वसूली
Pune Water Crisis: पुणे में मानसून की बेरुखी और बांधों में पानी घटने से एक दिन छोड़कर जलापूर्ति लागू है, जिससे 1500 से अधिक शिकायतें आई हैं। निजी टैंकर चालक वसूली में जुटे हैं।
- Written By: रूपम सिंह
पानी सप्लाई से मचा हाहाकार (फोटो क्रेडिट- सोशल मीडिया)
Pune Khadakwasla Dam Level Water Crisis: मानसून की बेरुखी और प्रमुख जलाशयों में पानी के लगातार घटते स्तर ने आम नागरिकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पुणे महानगर पालिका (पीएमसी) द्वारा लागू की गई पानी कटौती से स्थिति और भी चिंताजनक हो गई है। शहर में ‘एक दिन छोड़कर’ पानी की सप्लाई का निर्णय लागू होने के बाद से पानी से जुड़ी जन शिकायतों का अंबार लगने लगा है। 15 दिनों के भीतर ही पानी की किल्लत, कम दबाव से जलापूर्ति, समय पर पानी न मिलने और मुफ्त टैंकरों की अनुपलब्धता को लेकर शिकायतों का आंकड़ा 1500 के पार पहुंच चुका है।
बारिश के दगा देने से बढ़ी परेशानी
बारिश में हो रही देरी के कारण मनपा ने 15 दिन पहले ‘एक दिन छोड़कर पानी’ देने की नीति लागू की थी। स्थिति को नियंत्रण में रखने और नागरिकों तक पानी पहुंचाने के लिए मनपा ने टैंकरों के फेरों की संख्या भी बढ़ाई है। मनपा के पास उपलब्ध टैंकरों के अलावा बड़े पैमाने पर निजी टैंकरों की मदद ली जा रही है।
निजी टैंकर्स की मनमानी और लूटखसोट जारी
जलापूर्ति विभाग के के अनुसार, वर्तमान में लगभग 400 – निजी टैंकर विभिन्न पानी रिफिलिंग केंद्रों से पानी की सप्लाई कर रहे हैं। प्रतिदिन करीब 1600 से 1700 फेरे लगाए जा रहे हैं। निजी टैंकर चालकों की मनमानी और लूटखसोट की शिकायतें भी तेजी से बढ़ रही है।
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नागरिकों का आरोप है कि मनपा के केंद्रों से मुफ्त या बेहद कम दरों पर पानी भरने वाले कुछ ये चालक दूरी और पानी की तात्कालिक मांग के निजी टैंकर चालक मजबूरी का फायदा उठा रहे हैं। हिसाब से प्रति टैंकर 1200 रुपये से लेकर 3000 रुपये तक की मोटी रकम वसूल रहे है। टैंकर माफिया की इस मनमानी और बढ़ती दरों पर लगाम लगाने के लिए मनपा अब हरकत में आई है और एक नई गाइडलाइन बनाने पर जोर दिया है।
अब तक जोरदार बारिश नहीं
इस गंभीर स्थिति के पीछे मौसम का मिजाज और बांधों की स्थिति सबसे बड़ा कारण है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने इस साल अल-नीनो के प्रतिकूल प्रभाव के कारण औसत से कम बारिश होने की आशंका जताई है।
मानसून शुरू हो चुका है, लेकिन शहर में अब तक एक बार भी ढंग की बारिश नहीं हुई है। वर्तमान में खड़कवासला डैम श्रृंखला में केवल 5.03 टीएमसी पानी का स्टॉक बचा है। शहर के उपयोग के लिए केवल 3 टीएमसी पानी ही उपलब्ध है। भीषण संकट को भांपते हुए मनपा ने 15 मई से एक दिन छोड़कर जलापूर्ति शुरू की थी।
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लष्कर और एसएनडीटी से सबसे अधिक शिकायतें
इस व्यवस्था के कारण पूरे पुणे शहर की जलापूर्ति प्रणाली चरमरा गई है। सबसे ज्यादा शिकायतें लष्कर (पुणे कैटोनमेंट) और एसएनडीटी पानी आपूर्ति जलकेंद्र के तहत आने वाले क्षेत्रों से मिली हैं। इसके अलावा, रविवार पेठ, गणेश पेठ, सोमवार पेठ, सदाशिव पेठ, नारायण पेठ, नवी पेठ, लक्ष्मीनगर, सुतारदरा, कोथरुड, घोले रोड, सोमेश्वरवाडी, खड़की, शिरोले पथ, बाणेर, वारजे, कर्वेनगर, बोपोडी, धानोरी, लोहगांव, खराडी, वाघोली, विमाननगर और वडगांव शेरी जैसे विस्तारित इलाकों से नागरिक लगातार पानी के लिए गुहार लगा रहे है।
पुणे मनपा जलापूर्ति विभाग नंदकिशोर जगताप ने बाताया की प्रमुख अब तक प्राप्त शिकायतों में से 500 से अधिक समस्याओं का तुरंत निवारण कर दिया गया है। लेकिन सैकड़ों शिकायतें लंबित पड़ी हैं, जिन्हें आगामी दो दिनों के भीतर विशेष अभियान चलाकर हल करने का पूरा प्रयास किया जाएगा।
